हरिके में बनेगी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की यादगार, एसजीपीसी अध्यक्ष ने की घोषणा

हरिके में बनेगी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की यादगार, एसजीपीसी अध्यक्ष ने की घोषणा

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की याद में तरनतारन जिले के हरिके में जल्द ही एक भव्य स्मारक (यादगार) का निर्माण कराया जाएगा। इस बात का खुलासा एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने अमृतसर में किया। रविवार को श्री हरिमंदिर साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा गुरबख्श सिंह जी में जसवंत सिंह खालड़ा की स्मृति में आयोजित श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर एसजीपीसी द्वारा जसवंत सिंह खालड़ा की बहन बलबीर कौर तथा इस मामले के मुख्य गवाह कुलदीप सिंह बछड़े की पत्नी कमलजीत कौर को विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। श्रद्धांजलि समारोह के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज्ज ने कहा कि मानवाधिकारों का हनन किसी भी स्थान पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने एसजीपीसी को निर्देश दिया कि वर्ष 1982 से 1995 के दौरान पंजाब पुलिस द्वारा कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए व्यक्तियों के आंकड़े (डेटा) एकत्र किए जाएं। जत्थेदार ने कहा कि उस दशक में पंजाब में विशेष रूप से सिखों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया था, जबकि कुछ हिंदू भी इसका शिकार हुए थे। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले हरिके में ऐसे सभी पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई थी और उस स्थान का नाम 'शहीदी पत्तन' रखने, स्मारक बनाने तथा डेटा जुटाने का ऐलान किया गया था। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने जानकारी दी कि जसवंत सिंह खालड़ा और अन्य पीड़ितों की याद में स्मारक बनाने के लिए एक उप-समिति (सब-कमेटी) का गठन किया गया है। यह समिति जल्द ही हरिके में आवश्यक भूमि का प्रबंध करेगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा ने दावा किया था कि पंजाब पुलिस ने कथित फर्जी मुठभेड़ों में बड़ी संख्या में सिख युवाओं को मारा और उनके शवों को लावारिस बताकर विभिन्न श्मशान घाटों में जला दिया। उनके शोध के अनुसार, लगभग 25 हजार शवों को लावारिस बताकर उनका अंतिम संस्कार किया गया था। इस मामले की जांच और उजागर करने के दौरान ही उनका अपहरण कर लिया गया था और बाद में उन्हें लापता घोषित कर दिया गया। भोग समारोह में तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह, एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नण, अंतरिम कमेटी सदस्य मांगविंदर सिंह खापड़खेड़ी, भाई राजिंदर सिंह मेहता, एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका सहित धार्मिक व प्रशासनिक हस्तियां उपस्थित थीं।