पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन की चर्चा तेज़
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
पंजाब विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। इसी के साथ विभिन्न दलों के बीच संभावित गठबंधनों को लेकर चर्चाएँ भी बढ़ रही हैं। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की संभावना पहले से ही चर्चा में है, लेकिन अब यह भी कहा जा रहा है कि यदि यह गठबंधन होता है तो इसमें शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत धड़ा भी शामिल हो सकता है। भाजपा इस समय पंजाब की सत्ता में वापसी के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है। पार्टी ने राज्य में अपनी पहचान को नया रूप देने की कोशिश की है और बड़ी संख्या में सिख चेहरों को शामिल किया है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ कमजोर मानी जा रही है। ऐसे में पार्टी को सत्ता तक पहुँचने के लिए ऐसे सहयोगी की आवश्यकता है जो ग्रामीण वोट बैंक पर प्रभाव रखता हो। मौजूदा परिस्थितियों में शिरोमणि अकाली दल भाजपा के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है। दोनों दलों का पहले भी लंबे समय तक गठबंधन रहा है। हालांकि, वर्तमान में शिरोमणि अकाली दल की ताकत विभाजित है। यदि पुनर सुरजीत धड़ा भी इस गठबंधन में शामिल होता है तो इसकी शक्ति पहले की तरह मज़बूत हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और पुनर सुरजीत धड़े के बीच इस विषय पर बातचीत हो चुकी है। लेकिन इसमें सबसे बड़ा अड़चन शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की भूमिका को लेकर है। पुनर सुरजीत धड़े के कुछ नेताओं का मानना है कि गठबंधन से पहले सुखबीर सिंह बादल को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहिए। जानकारी के मुताबिक, पुनर सुरजीत धड़े के नेता भाजपा हाईकमान से मिल चुके हैं और उन्होंने कुछ शर्तें भी रखी हैं। इन शर्तों को हाल ही में राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में भी शामिल किया गया था। इसी बीच, भाजपा-अकाली गठबंधन को लेकर सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री से मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सभी धड़े इस बात पर सहमत हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए मज़बूत गठबंधन की आवश्यकता है। भाजपा ने इस संदर्भ में पंथक मुद्दों और किसानों से जुड़े मसलों पर भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। वर्तमान समय में सबसे बड़ा पंथक मुद्दा बंदी सिखों की रिहाई से जुड़ा हुआ है।
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