इंडोनेशिया में माउंट सिनाबंग ज्वालामुखी फटा, आसमान में 3,500 मीटर तक उठा राख का गुबार

इंडोनेशिया में माउंट सिनाबंग ज्वालामुखी फटा, आसमान में 3,500 मीटर तक उठा राख का गुबार

इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा प्रांत में माउंट सिनाबंग ज्वालामुखी सोमवार सुबह फट गया। विस्फोट के बाद ज्वालामुखीय राख का घना गुबार उठा और आसपास के शहर बेरास्तागी के ऊपर फैल गया। एक स्थानीय अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। सिनाबंग ज्वालामुखी ऑब्जर्वेशन पोस्ट के प्रमुख अरमेन पुत्रा के अनुसार, ज्वालामुखी के शिखर से गहरे और घने राख का एक स्तंभ लगभग 3,500 मीटर की ऊंचाई तक उठा। इसके बाद यह पूर्व और दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर बढ़ा। विस्फोट को 120 मिलीमीटर के अधिकतम आयाम वाले सीस्मोग्राम पर दर्ज किया गया और यह करीब एक घंटे तक जारी रहा। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ज्वालामुखीय राख ने बेरास्तागी की सड़कों और वाहनों को ढक दिया, जिससे इलाके में दृश्यता भी कम हो गई। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से मास्क पहनने और सतर्क रहने की अपील की है। प्रभावित इलाकों के स्कूलों ने भी विद्यार्थियों और शिक्षकों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है। माउंट सिनाबंग फिलहाल स्तर-II यानी चेतावनी की स्थिति में है। ज्वालामुखी के शिखर के तीन किलोमीटर के दायरे और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में 4.5 किलोमीटर तक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। ज्वालामुखी से निकलने वाली नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को संभावित लहर प्रवाह के खतरे को लेकर भी चेतावनी दी गई है। पहले भी ज्वालामुखी विस्फोट से हुई थी मौतें मई में इंडोनेशिया के उत्तरी मालुकु प्रांत में माउंट डुकोनो के विस्फोट के बाद तीन लोगों की मौत हो गई थी। 8 मई को स्थानीय समयानुसार सुबह 7:40 बजे माउंट डुकोनो में विस्फोट हुआ था। इस दौरान ज्वालामुखीय राख का एक स्तंभ आसमान में लगभग 10 किलोमीटर तक पहुंच गया था। स्थानीय बचाव अधिकारियों ने लोगों को ज्वालामुखी के क्रेटर के चार किलोमीटर के दायरे में गतिविधियां नहीं करने की चेतावनी दी थी। इसके साथ ही बारिश के दौरान ज्वालामुखीय कीचड़ के प्रवाह की आशंका को लेकर भी चेताया गया था। फरवरी में भी फटा था माउंट डुकोनो इस साल फरवरी में भी माउंट डुकोनो में विस्फोट हुआ था। इसके बाद देश के ज्वालामुखी एवं भूवैज्ञानिक आपदा न्यूनीकरण केंद्र ने विमानन संबंधी चेतावनी जारी की थी। हलमहेरा द्वीप पर स्थित इस ज्वालामुखी ने उस समय आसमान में करीब 2,000 मीटर ऊंचाई तक राख का स्तंभ उछाला था। घने सफेद से भूरे रंग के बादल क्रेटर से दक्षिण दिशा की ओर बढ़े थे। विमानन क्षेत्र के जोखिम को कम करने के लिए ऑरेंज स्तर की वोल्केनो ऑब्जर्वेटरी नोटिस फॉर एविएशन (VONA) जारी की गई थी। यह दूसरी सबसे ऊंची चेतावनी है। इसके तहत विमानों को ज्वालामुखी के आसपास पांच किलोमीटर से कम दूरी पर उड़ान भरने से बचने के लिए कहा गया था। विमानों को राख के बादलों को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी, क्योंकि ज्वालामुखीय राख हवाई उड़ानों में व्यवधान पैदा कर सकती है।