ताशकंद में भारत-उज़्बेकिस्तान वार्ता के अहम नतीजे, व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर जोर

ताशकंद में भारत-उज़्बेकिस्तान वार्ता के अहम नतीजे, व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ हुई बातचीत के प्रमुख नतीजों को साझा किया। दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ व्यापार, डिजिटल बुनियादी ढांचे, AI, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा, वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 5 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, बुनियादी ढांचे, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और अंतरिक्ष सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। साथ ही बाजार पहुंच, कनेक्टिविटी, बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने वार्ता के दौरान अंतिम रूप दिए गए कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) और समझौतों की जानकारी भी साझा की। प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा को लेकर आयोजित विशेष ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के पश्चिम सचिव सिबी जॉर्ज ने बताया कि भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष जल्द ही इस संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के करीब हैं। वार्ता का एक अन्य महत्वपूर्ण परिणाम उज्बेकिस्तान में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की शुरुआत है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कदम भारतीय डिजिटल बुनियादी ढांचे के वैश्विक विस्तार से जुड़ा है और दोनों देशों के बीच डिजिटल लेनदेन को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा। खनन क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। भारत के खान मंत्रालय और उज्बेकिस्तान के खान उद्योग एवं भूविज्ञान मंत्रालय के बीच भूविज्ञान तथा खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें महत्वपूर्ण खनिजों और यूरेनियम की आपूर्ति से जुड़े विषय भी शामिल हैं। सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में भी समझौता हुआ। विदेश मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत एजेंसी के बीच तेरमेज में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज टेपा और कराटेपा के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। भारत और उज्बेकिस्तान ने आयुर्वेद तथा चिकित्सा की अन्य पारंपरिक प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी एक समझौता ज्ञापन किया। इसके अलावा, सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस और उज्बेकिस्तान की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्ल्ड इकोनॉमी एंड डिप्लोमेसी की डिप्लोमैटिक अकादमी के बीच भी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की राष्ट्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन समिति के बीच सहयोग संबंधी समझौते को अंतिम रूप दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच पर्यावरण और जलवायु से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ है।