‘ऑपरेशन सिंधूर’ के बाद भारतीय सेना में बड़ा बदलाव, ड्रोन और AI पर बढ़ा जोर
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
‘ऑपरेशन सिंधूर’ के एक वर्ष बाद भारतीय सेना ने अपनी युद्ध रणनीति और संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव किए हैं। मई 2025 में हुए इस ऑपरेशन से मिले अनुभवों के आधार पर सेना अब पारंपरिक युद्ध पद्धतियों से आगे बढ़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तकनीक और प्रिसीजन स्ट्राइक पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। इस ऑपरेशन ने यह संकेत दिया है कि भविष्य के युद्ध बिना आमने-सामने आए भी जीते जा सकते हैं, जिसे ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ कहा जाता है। साल 2001 के संसद हमले के बाद अपनाई गई ‘कोल्ड स्टार्ट’ नीति अब विकसित होकर ‘कोल्ड स्ट्राइक’ रणनीति में बदल चुकी है। इस नई रणनीति के तहत सेना बिना सीमा पार किए दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और प्रभावी हमले कर सकती है। पूर्व सैन्य अधिकारियों के अनुसार, भारत अब ‘रणनीतिक संयम’ से आगे बढ़कर ‘दंडात्मक कार्रवाई’ की नीति अपना रहा है। सेना की नई संरचना में ‘रुद्र’ ब्रिगेड का गठन एक महत्वपूर्ण कदम है। जुलाई 2025 से दो ‘रुद्र’ ब्रिगेड सक्रिय हैं, जिनमें पैदल सेना, तोपखाना और ड्रोन सपोर्ट को एकीकृत किया गया है। ये इकाइयाँ मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम हैं। इसी तरह ‘भैरव’ लाइट कमांडो बटालियन भी सेना की ताकत बढ़ा रही हैं। करीब 300 जवानों वाली ये इकाइयाँ पैदल सेना और स्पेशल फोर्सेज के बीच की कड़ी के रूप में काम करती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की जानकारी जुटाना और तेजी से लक्षित ठिकानों को नष्ट करना है। सेना ऐसी 25 बटालियन तैयार कर रही है। ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए हर पैदल बटालियन में ‘अशनि’ प्लाटून और आर्मर्ड रेजिमेंट में ‘शौर्य’ स्क्वाड्रन शामिल किए गए हैं। ये इकाइयाँ ड्रोन संचालन में विशेषज्ञ हैं और युद्ध के दौरान सटीक जानकारी व हमले में अहम भूमिका निभाती हैं। तोपखाने में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पारंपरिक तोपों की जगह अब ‘शक्तिबाण’ इकाइयों को शामिल किया गया है, जो स्वार्म ड्रोन और लंबी दूरी के मानव रहित विमान (UAV) से लैस हैं। ये इकाइयाँ 500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं। सेना ने प्रशिक्षण प्रणाली में भी बदलाव किया है। आधुनिक ‘टेक-वारियर’ तैयार करने के लिए अब प्रशिक्षण में सेंसर-टू-शूटर सिस्टम, साइबर वॉरफेयर और ऑटोमेटेड तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा, नई तकनीकों के विकास के लिए IIT जैसे संस्थानों के साथ सहयोग भी बढ़ाया गया है।
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