जम्मू-कश्मीर: IAS अधिकारी द्वारा महिला अफसर से बदसलूकी पर बवाल, सीएम उमर अब्दुल्ला ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

जम्मू-कश्मीर: IAS अधिकारी द्वारा महिला अफसर से बदसलूकी पर बवाल, सीएम उमर अब्दुल्ला ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

जम्मू-कश्मीर में एक आधिकारिक वर्चुअल बैठक के दौरान वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी द्वारा एक महिला प्रशासनिक अधिकारी के साथ बदसलूकी और अभद्र भाषा का प्रयोग करने का मामला गरमाता जा रहा है। इस घटना का गंभीर संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव अटल डुल्लू को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रभावित महिला JKAS (जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा) अधिकारी के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक या बदलाखोरी वाली कार्रवाई न हो। यह पूरा मामला 2010 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन से जुड़ा है, जो वर्तमान में श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव के पद पर कार्यरत हैं। आरोप है कि रंजन ने एक विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान गंदेरबल में सहायक निदेशक (रोजगार) के रूप में तैनात 2015 बैच की महिला अधिकारी बीनिश वानी के साथ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की। सत्तारूढ़ पार्टी का कड़ा रुख और पूर्ण राज्य का मुद्दा सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने शुक्रवार को बताया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही बनी रहनी चाहिए और किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को अपने पद का दुरुपयोग करके दूसरों को डराने-धमकाने या प्रताड़ित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सादिक ने यह भी कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर एक पूर्ण राज्य होता, तो जांच लंबित रहने तक उक्त आईएएस अधिकारी को तुरंत सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से अटैच कर दिया गया होता। उन्होंने कहा कि वर्तमान केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे में आईएएस अधिकारी उपराज्यपाल (LG) के नियंत्रण में आते हैं, जो यह दर्शाता है कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कितनी महत्वपूर्ण है। विभाग की सफाई और एसोसिएशन का पलटवार विवाद बढ़ने के बाद कुमार राजीव रंजन के नेतृत्व वाले विभाग ने एक स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो क्लिप "चुनिंदा रूप से संपादित" (selectively edited) और असत्यापित हैं। विभाग के अनुसार, प्रशासनिक बैठकों में वरिष्ठों के प्रति सम्मान और पेशेवर शिष्टाचार आवश्यक है और मामले को नियमानुसार तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि, 'ऑल जे एंड के जूनियर स्केल केएएस एसोसिएशन' (AJJSKA) ने विभागीय स्पष्टीकरण को पूरी तरह खारिज करते हुए घटना की कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन ने कहा कि यह वीडियो पूरी तरह से प्रामाणिक है, जिसकी पुष्टि खुद पीड़ित महिला अधिकारी और बैठक में मौजूद अन्य अधिकारियों ने की है। एसोसिएशन ने कहा कि बिना किसी तकनीकी जांच के वीडियो को फर्जी या संपादित बताना जनता को गुमराह करने का प्रयास है। उन्होंने उपराज्यपाल, मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग से घटना और विभागीय स्पष्टीकरण दोनों की निष्पक्ष जांच कराने और कार्यस्थल पर अधिकारियों की गरिमा की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है।