बिना काम कराए हड़प लिए 24.34 लाख रुपये: विजिलेंस ब्यूरो का फरीदकोट में बड़ा एक्शन, भ्रष्टाचार के आरोप में FIR दर्ज

बिना काम कराए हड़प लिए 24.34 लाख रुपये: विजिलेंस ब्यूरो का फरीदकोट में बड़ा एक्शन, भ्रष्टाचार के आरोप में FIR दर्ज

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (VB) ने फरीदकोट में शहरी जल सप्लाई के रखरखाव के लिए आवंटित फंडों में से लगभग 24.34 लाख रुपये का गबन करने के आरोप में जल सप्लाई और सैनिटेशन (WSS) विभाग के छह अधिकारियों और तीन निजी ठेकेदारों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। इस बड़ी कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। नामजद अधिकारी और ठेकेदार विजिलेंस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, नामजद किए गए अधिकारियों में कार्यकारी अभियंता (XEN) जसविंदर सिंह, उप-मंडल अभियंता (SDO) संदीप सिंह, कनिष्ठ अभियंता (JE) परविंदर सिंह, वरिष्ठ सहायक जसमीत सिंह और तारा सिंह, तथा डेटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह शामिल हैं। इसके अलावा इस घोटाले में तीन निजी ठेकेदारों—करनैल सिंह, हरदीप सिंह और जसवीर सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान हुए चौंकाने वाले खुलासे जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जल सप्लाई और सैनिटेशन विभाग ने फरीदकोट शहर की जल सप्लाई योजना के रखरखाव के लिए 23 अक्टूबर 2024 को 73.36 लाख रुपये आवंटित किए थे। हालांकि, आरोपियों ने जमीनी स्तर पर कोई वास्तविक कार्य किए बिना ही मिलीभगत करके 24.34 लाख रुपये की राशि कथित तौर पर हड़प ली। अधीक्षण अभियंता (SE) नरिंदर सिंह द्वारा सौंपी गई विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई विस्तृत पड़ताल में यह बात सामने आई कि एक ही दिन यानी शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2024 को नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बेहद तेजी से फर्जी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिना किसी पूर्व अनिवार्य रिपोर्ट या ड्राफ्टिंग के ही कोटेशन नोटिस जारी कर दिए गए। एक्सईएन जसविंदर सिंह ने अनिवार्य तुलनात्मक विवरणों और मिलान को नजरअंदाज करते हुए कार्यों को मंजूरी दे दी। उसी दिन अनुमानित लागत को बढ़ाकर लगभग 5 लाख रुपये प्रति कार्य कर दिया गया। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सुखपिंदर सिंह के फर्जी हस्ताक्षरों वाली धोखाधड़ी से बढ़ाई गई स्वीकृतियां वरिष्ठ सहायक जसमीत सिंह के माध्यम से जारी की गई थीं। कागजों में पूरे किए गए काम और भुगतान जांच में खुलासा हुआ कि काम 25 अक्टूबर को शुरू दिखाकर वीकेंड (सप्ताहांत) के दौरान ही पूरे होने का दावा कर दिया गया। बिल बिना ठेकेदारों के हस्ताक्षर या डिस्पैच नंबर के जमा किए गए थे। जेई परविंदर सिंह ने साइट का मुआयना किए बिना ही माप पुस्तिका (MB) में झूठी एंट्रियां दर्ज कर दीं, जबकि डेटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह ने वरिष्ठ सहायक तारा सिंह के साथ मिलकर उन्हें पास कर दिया। 29 अक्टूबर 2024 तक ठेकेदारों के बैंक खातों में भुगतान भी भेज दिया गया। पड़ताल के दौरान ठेकेदारों हरदीप सिंह और करनैल सिंह ने खुद इस बात की पुष्टि की कि मौके पर कोई वास्तविक काम नहीं किया गया था। हेड ऑफिस और रेंज के अधिकारियों के निर्देश पर मामला दर्ज करने वाले विजिलेंस ब्यूरो यूनिट फरीदकोट के डीएसपी विनोद कुमार ने बताया कि वह खुद इस मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं। इस घोटाले में अन्य अधिकारियों या निजी व्यक्तियों की संलिप्तता की संभावना की जांच के लिए आगे की कार्रवाई जारी है।