पेपर लीक विवाद पर बड़ा कदम, मेडिकल प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सुधार चाहती FAIMA
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
NEET (UG) 2026 परीक्षा कथित पेपर लीक मामले के बाद रद्द किए जाने के एक दिन बाद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एसोसिएशन ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग करते हुए इसे “सिस्टम की विफलता” बताया है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा 3 मई को आयोजित NEET (UG) 2026 परीक्षा को मंगलवार को रद्द कर दिया गया था। मामले में कथित पेपर लीक की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जांच सौंपी गई है। FAIMA ने अपनी याचिका में राष्ट्रीय परीक्षा ढांचे में व्यापक सुधार की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को निर्देश देने की अपील की है कि NTA की जगह एक “तकनीकी रूप से उन्नत और स्वायत्त संस्था” बनाई जाए, ताकि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता और गरिमा को बहाल किया जा सके। याचिका में संरचनात्मक और तकनीकी सुधारों की भी मांग की गई है। इसमें प्रश्न पत्रों की अनिवार्य “डिजिटल लॉकिंग” व्यवस्था लागू करने और कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मॉडल अपनाने का सुझाव दिया गया है, ताकि परीक्षा सामग्री के परिवहन और भंडारण से जुड़े जोखिमों को समाप्त किया जा सके। पिटीशन में यह भी मांग की गई है कि वर्ष 2026 की पुनः आयोजित परीक्षा की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति गठित की जाए। समिति में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी शामिल करने की मांग की गई है। इसके अलावा, एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि CBI को चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए। इस रिपोर्ट में पेपर लीक जांच की प्रगति, पकड़े गए नेटवर्क, की गई गिरफ्तारियों और आरोपियों के खिलाफ उठाए गए कदमों का विवरण शामिल हो। याचिका में आरोप लगाया गया है कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हो रहे कथित “गेस पेपर” के 100 से अधिक प्रश्न वास्तविक प्रश्न पत्र से मेल खाते थे। पिटीशनकर्ता ने कहा कि NEET (UG) 2026 परीक्षा रद्द होने के कारण 22 लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थी और उनके परिवार नई परीक्षा तिथि, एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्रों और काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर चिंता में हैं।
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