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मोगा में फर्जी जमानत गिरोह का भंडाफोड़: जेल के अंदर से चल रहा था जाली दस्तावेजों का खेल

28 Oct, 2026 09:53 AM

अदालती प्रणाली का दुरुपयोग कर खतरनाक अपराधियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत दिलाने वाले एक बड़े संगठित रैकेट का मोगा सीआईए (CIA) स्टाफ ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह अदालतों को गुमराह करने के लिए फर्जी पहचान पत्र, जाली पंचायत कार्ड और संपत्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। यह पूरा मामला जुडिशल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास, मोगा की अदालत द्वारा भेजी गई एक औपचारिक चिट्ठी के बाद सामने आया है। थाना दक्षिण मोगा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले की जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस साजिश की रूपरेखा जेल में बंद जसप्रीत सिंह उर्फ ज़ैद ब्लैक ने जेल के अंदर से ही तैयार की थी। पुलिस के मुताबिक, जसप्रीत की पत्नी अनुजा ने अपने दो अज्ञात साथियों के साथ मिलकर फर्जी पहचान और संपत्ति के दस्तावेज तैयार किए। इस गिरोह ने गांव झंडेआणा गढ़ी के निवासियों जरनैल सिंह और हरजिंदर सिंह के नाम पर फर्जी पहचान पत्र और पंचायत सदस्य कार्ड बनाकर अदालत में जमानत के लिए इस्तेमाल किए थे। जिला अदालतों में फैल रहे इस प्रकार के फर्जी जमानत रैकेट का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले फरीदकोट में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां एक आरोपी ने गांव मचाकी कलां के एक मृतक जमीन मालिक के दस्तावेज लगाकर अदालत से जमानत हासिल कर ली थी। जमानत मिलने के बाद हुई जांच में इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ था। जांचकर्ताओं के अनुसार, ऐसे गिरोह फर्जी पहचान पत्रों, जाली पंचायत कार्डों और बनावटी जमाबंदियों के सहारे फर्जी ('घोस्ट') जमानती खड़े करते हैं और अदालती प्रक्रिया को धोखा देने के बदले अपराधियों से मोटी रकम वसूलते हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस ने ऐसे फर्जी रैकेटों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मोगा पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है ताकि इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर इसे पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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