नौकरी खोने के डर से सड़कों पर उतरेंगे आम आदमी क्लिनिक के कर्मचारी, 12 नवंबर को संगरूर में प्रदर्शन की चेतावनी

नौकरी खोने के डर से सड़कों पर उतरेंगे आम आदमी क्लिनिक के कर्मचारी, 12 नवंबर को संगरूर में प्रदर्शन की चेतावनी

पंजाब के आयुष्मान आरोग्य केंद्रों (पूर्व में आम आदमी क्लिनिक) में कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 'आम आदमी क्लिनिक साझा फ्रंट' के बैनर तले कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी नौकरी की सुरक्षा, वेतन वृद्धि और नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान लाभ देने की मांगों को स्वीकार नहीं किया गया, तो वे 12 नवंबर को संगरूर में बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की चेतावनी भी दी है। पंजाब आम आदमी क्लिनिक फार्मासिस्ट यूनियन के अध्यक्ष परमजीत सिंह ने बताया कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य भर में चल रहे करीब 1,090 क्लिनिकों के कर्मचारियों—जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, क्लिनिकल असिस्टेंट और अन्य स्टाफ शामिल हैं—में अपनी नौकरियों के भविष्य को लेकर भारी चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद मोहल्ला क्लिनिक बंद कर दिए गए थे, और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी हाल ही में कहा था कि यदि 'आप' सत्ता में नहीं रहती है तो पंजाब में भी ये क्लिनिक बंद हो सकते हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकों के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। आम आदमी पार्टी मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. तलविंदर पाल सिंह ने जानकारी दी कि इन क्लिनिकों में 4,000 से अधिक कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्टाफ को इम्पैनलमेंट (पैनल) के माध्यम से रखा गया है, जबकि उनकी मुख्य मांग है कि उन्हें विभागीय अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर लाया जाए। इसके अलावा, कर्मचारी इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) में बढ़ोतरी, साल के 365 दिनों का भुगतान, रविवार व राजपत्रित (गजटेड) छुट्टियों के साथ-साथ कैशलेस स्वास्थ्य और जीवन बीमा की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में प्रति मरीज मेडिकल ऑफिसर को 50 रुपये, फार्मेसी ऑफिसर को 12 रुपये और क्लिनिकल असिस्टेंट को 11 रुपये दिए जाते हैं। इस बीच, आम आदमी क्लिनिक क्लिनिकल असिस्टेंट एसोसिएशन की अध्यक्ष जसवीर कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सरकार बनने के समय "पक्का रोजगार" देने का भरोसा दिया था, लेकिन क्लिनिक स्टाफ को अब तक नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ तत्काल बैठक की मांग की और कहा कि कर्मचारी इम्पैनलमेंट के बजाय सीधे किसी सरकारी विभाग के अधीन काम करना चाहते हैं।