संगरूर जेल से रिहा हुईं बेरोजगार शिक्षिकाएं, बोलीं- पांच दिन की मानसिक पीड़ा कभी नहीं भूलेंगे
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
रोजगार की मांग को लेकर आंदोलन कर रही पंजाब की पांच बेरोजगार ईटीटी शिक्षिकाओं ने संगरूर जिला जेल में बिताए पांच दिनों को अपनी जिंदगी का सबसे पीड़ादायक अनुभव बताया है। रिहाई के बाद शिक्षिकाओं ने कहा कि वे नौकरी की मांग लेकर सरकार के पास गई थीं, लेकिन उन्हें जेल की सजा भुगतनी पड़ी। उनका कहना है कि जेल में झेली गई मानसिक पीड़ा और वहां पूछे गए सवालों को वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगी। बुधवार शाम करीब सवा सात बजे संगरूर जिला जेल से रिहा हुईं इन पांच शिक्षिकाओं को 4 जुलाई को धूरी में 5994 भर्ती प्रक्रिया पूरी कराने की मांग को लेकर लगाए गए स्थायी धरने से पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में संगरूर जेल भेज दिया गया था। रिहा हुई पांच शिक्षिकाओं में चार अविवाहित हैं। उनका कहना है कि इतनी कम उम्र में जेल जाना उनके लिए बेहद दर्दनाक अनुभव रहा। शिक्षिकाओं में से एक ने बताया कि उन्हें जेल की उस बैरक में रखा गया था, जहां आपराधिक मामलों में बंद महिला कैदी रह रही थीं। उन्होंने बताया कि बैरक में उनके सहित कुल 18 महिलाएं थीं। वहां मौजूद महिला कैदियों ने उनसे बार-बार सवाल किए कि वे कितने हत्या के मामलों में शामिल हैं, कितना नशीला पदार्थ बेच चुकी हैं, किस तरह की तस्करी की है और किस अपराध में गिरफ्तार हुई हैं। शिक्षिकाओं ने कहा कि ऐसे सवालों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि पढ़ी-लिखी होने के बावजूद उनसे बैरकों की सफाई भी करवाई जाती थी। बेरोजगार ईटीटी 5994 शिक्षक यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बावा ने कहा कि सरकार एक ओर "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" का नारा देती है, जबकि दूसरी ओर पढ़-लिखकर रोजगार मांगने वाली बेटियों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार जहां "मां-बेटी सम्मान योजना" के तहत 1000/1500 रुपये देकर सम्मान की बात करती है, वहीं रोजगार मांगने वाली बेटियों को जेल भेजकर उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है। अशोक बावा ने सरकार से सवाल किया कि इन बेटियों के सम्मान की रक्षा कौन करेगा। उन्होंने बताया कि रिहा हुई पांचों शिक्षिकाओं ने जमानत नहीं कराई थी। फिलहाल 15 अन्य बेरोजगार शिक्षक अभी भी जेल में बंद हैं। रिहाई के बाद विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जेल के बाहर पहुंचकर पांचों शिक्षिकाओं का फूलमालाओं से स्वागत किया। इस अवसर पर डीटीएफ के दाता सिंह और सुखविंदर गिर, 1158 यूनियन के निरभय सिंह, देश भगत यादगार कमेटी लोंगोवाल के बलवीर सिंह लोंगोवाल, जम्हूरी अधिकार सभा के जुझार लोंगोवाल, देवी दयाल, जीटीयू के बग्गा सिंह, एससी/बीसी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण सिंह दुग्गां, पीएसयू के मंगा सिंह, क्रांतिकारी ग्रामीण मजदूर यूनियन के लखवीर लोंगोवाल तथा बीकेयू के जगदीप सिंह सहित विभिन्न भाईचारा संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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