विधानसभा चुनाव से पहले तेज हुई जांच, कई बड़े नेताओं पर कार्रवाई के संकेत

विधानसभा चुनाव से पहले तेज हुई जांच, कई बड़े नेताओं पर कार्रवाई के संकेत

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार और राज्य में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के अधीन काम करने वाली जांच एजेंसियां राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सक्रिय हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में खासकर शिरोमणि अकाली दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में पंजाब विधानसभा ने विशेष सत्र में “जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026” पारित किया है, जिसमें बेअदबी के मामलों में उम्रकैद सहित सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इस संशोधन के बाद 2015 के बरगाड़ी बेअदबी मामलों और उनसे जुड़े कोटकपूरा तथा बेहबल कलां गोलीकांड मामलों में जांच तेज होने की उम्मीद है। ऐसे में सुखबीर सिंह बादल समेत अकाली दल के कई नेताओं को नई जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कुछ कांग्रेस नेताओं के भी जांच के दायरे में आने की संभावना जताई गई है। इसी बीच, राज्य सरकार के अधीन पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जांच तेज कर दी है। भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कई वरिष्ठ नेताओं पर कार्रवाई शुरू होने के संकेत हैं। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी आप नेताओं पर लगातार कार्रवाई की है, जबकि विजिलेंस ब्यूरो पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के मामलों की जांच जारी रखे हुए है। ईडी की हालिया कार्रवाई में पंजाब के उद्योग मंत्री संजీవ अरोड़ा और उनके परिवार से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की गई। इससे दो दिन पहले, 15 अप्रैल को ईडी ने आप के राज्यसभा सदस्य अशोक कुमार मित्तल और उनके परिवार से जुड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर भी छापे मारे थे। इस कार्रवाई में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, फगवाड़ा से जुड़े परिसरों, जालंधर स्थित आवासों और गुरुग्राम की संपत्तियों को शामिल किया गया। यह छापेमारी कथित फंड कुप्रबंधन के मामलों में FEMA के तहत की गई बताई गई है। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत आप के नेताओं ने इन कार्रवाइयों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा 2027 के चुनाव से पहले पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।