‘प्रगति’ बैठक में PM मोदी ने की 30 हजार करोड़ की परियोजनाओं की समीक्षा
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
PM मोदी की राज्यों से अपील: सहयोग और तकनीक के जरिए सुलझाएं पानी के विवाद नई दिल्ली, 28 मई 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों से अपील की है कि वे आपसी सहयोग, समय पर मंजूरियों और तकनीक आधारित निगरानी के माध्यम से अंतरराज्यीय जल विवादों का समाधान करें। उन्होंने कहा कि ‘केन-बेतवा लिंक परियोजना’ को इस दिशा में एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जाना चाहिए। बुधवार शाम आयोजित 51वीं ‘प्रगति’ (PRAGATI) बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री ने नौ राज्यों से जुड़े रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्र के सात महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 30 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकारी परियोजनाओं में देरी होने से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि आम नागरिकों तक जरूरी सुविधाएं समय पर पहुंचाने में भी बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने राज्यों को नदियों को जोड़ने, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की सलाह दी, ताकि दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रधानमंत्री ने ‘केन-बेतवा लिंक परियोजना’ के अलावा ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0’ की भी समीक्षा की। उन्होंने ठोस कचरा प्रबंधन, वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और ‘गोबरधन’ परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया। बिजली क्षेत्र की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने शहरों, आवासीय क्षेत्रों और सरकारी संस्थानों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के अभियान को तेज करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने नहरों के किनारों और नहरों के ऊपर सोलर पैनल लगाने जैसे नवाचारों को बढ़ावा देने की भी बात कही। उनका कहना था कि इससे जमीन की बचत होगी, पानी के वाष्पीकरण में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। सड़क और बंदरगाह संपर्क परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वधावन पोर्ट’ को मल्टी-मॉडल विकास के मॉडल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे केवल बंदरगाह तक सीमित न रखते हुए तटीय शिपिंग, रेलवे, हाईवे और हवाई अड्डों से जुड़े राष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने पर बल दिया। बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार राज्यों में सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की नई व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत सबसे पहले स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा की जा रही है।
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