फर्जी सहमति पत्र और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की कार्रवाई तेज
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मोहाली के बिल्डर अजय सहगल को शुक्रवार देर रात गिरफ्तार किए जाने के बाद शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने ED को सहगल की पांच दिन की रिमांड मंजूर कर दी। जानकारी के अनुसार, ED ने शुक्रवार को GMADA के पांच सदस्यीय स्टाफ के साथ-साथ इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी (ICHBS) और ‘सनटेक सिटी’ परियोजना से जुड़े पदाधिकारी अजय सहगल को पूछताछ के लिए तलब किया था। पूछताछ के बाद GMADA टीम को वापस भेज दिया गया, जबकि सहगल को हिरासत में ले लिया गया। ED अधिकारियों के मुताबिक, अजय सहगल, जो ICHBS का सचिव भी है, को जालंधर स्थित ED कार्यालय द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले इसी महीने ED ने ‘सनटेक सिटी’ परियोजना और उससे जुड़े विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर आधारित है। शिकायत उन किसानों की ओर से की गई थी, जिनका आरोप था कि CLU (चेंज ऑफ लैंड यूज़) हासिल करने के लिए उनकी सहमति फर्जी तरीके से तैयार की गई। ED के अनुसार, अजय सहगल पर 15 लोगों की मालिकाना हक वाली 30.5 एकड़ जमीन के संबंध में फर्जी सहमति पत्र तैयार करने का आरोप है। एजेंसी का कहना है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ‘सनटेक सिटी’ नामक रियल एस्टेट मेगा प्रोजेक्ट के लिए CLU हासिल किया गया। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि सहमति पत्रों में जमीन मालिकों के फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान इस्तेमाल किए गए थे। इसके अलावा, सहगल पर इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ‘ला कैनेला’ नामक रिहायशी बहुमंजिला परिसर और ‘डिस्ट्रिक्ट 7’ व्यावसायिक परियोजना विकसित करने का भी आरोप है। ED ने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं में फ्लैट और प्लॉट रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की मंजूरी और पंजीकरण से पहले ही बेचे जा रहे थे। एजेंसी के मुताबिक, इन कथित अवैध परियोजनाओं से 200 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित प्लॉट अब तक ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग तथा GMADA के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य सरकारी एजेंसियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ED ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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