‘डिजिटल अरेस्ट’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बुजुर्ग महिला के पूरे रिटायरमेंट फंड की ठगी का मामला सामने
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) नामक बढ़ते साइबर अपराध पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि शिक्षित लोगों का भी इस तरह की ठगी का शिकार होना हैरान करने वाला है। मुख्य न्यायाधीश D. Y. Chandrachud और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने एक ताजा मामले का हवाला देते हुए कहा कि एक बुजुर्ग महिला इस तरह की ठगी में अपने सेवानिवृत्ति के सभी लाभ खो बैठी। पीठ ने टिप्पणी की, “यह आश्चर्यजनक है कि पढ़े-लिखे लोग भी ऐसे धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं।” यह टिप्पणी उस समय की गई जब अटॉर्नी जनरल R. Venkataramani ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े पीड़ितों के मामले में स्वत: संज्ञान (Suo Motu) याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस विषय पर एक अंतर-विभागीय बैठक हो चुकी है और अंतिम बैठक जल्द आयोजित की जाएगी। साथ ही, उन्होंने इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित करने का अनुरोध किया, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। पीठ ने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए बताया कि एक बुजुर्ग महिला, जिसे वे अपने आधिकारिक कार्य के दौरान जानते थे, इस तरह की ठगी का शिकार हो गई। न्यायमूर्ति Surya Kant ने कहा कि दुर्भाग्यवश उस महिला के सभी रिटायरमेंट फंड ठग लिए गए। अदालत के सहयोगी (Amicus Curiae) और वरिष्ठ अधिवक्ता N. S. Nappinai ने बताया कि ऐसे मामलों में ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को डराते हैं, जिससे वे मानसिक रूप से ‘सुन्न’ हो जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे वित्तीय लेन-देन को रोकने के लिए मध्यस्थ संस्थाओं को ‘किल-स्विच’ जैसी सुविधा लागू करनी चाहिए, जिससे संभावित नुकसान को तुरंत रोका जा सके। ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक उभरता हुआ रूप है, जिसमें ठग खुद को कानून प्रवर्तन या न्यायिक अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। इससे पहले, 24 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक 78 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंकर की याचिका पर केंद्र सरकार, Central Bureau of Investigation और अन्य एजेंसियों को नोटिस जारी किया था। इस मामले में पीड़ित को करीब एक महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 23 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। 17 अक्टूबर 2025 को भी अदालत ने न्यायालय के आदेशों की नकल कर लोगों को ठगने के मामलों पर गंभीर चिंता जताई थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने अंबाला के एक बुजुर्ग दंपत्ति से 1.05 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। इसके अलावा, 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल फ्रॉड के जरिए 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को ‘डकैती’ करार दिया था और केंद्र सरकार को Reserve Bank of India तथा बैंकों के साथ मिलकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया था। अदालत ने बैंकों को साइबर धोखाधड़ी रोकने में सक्रिय भूमिका निभाने और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक ढांचा विकसित करने के निर्देश भी दिए हैं। पिछले वर्ष 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में डिजिटल अरेस्ट घोटालों की जांच Central Bureau of Investigation से कराने का आदेश दिया था और इसमें बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की भी जांच करने को कहा था।
Leave a Reply