लाहौर में सिख विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ने मरियम नवाज को लिखा पत्र
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ को एक औपचारिक पत्र लिखकर लाहौर के अंदरूनी हिस्से में स्थित सिख इतिहास से जुड़े धरोहर स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। विशेष रूप से, उन्होंने लाहौर के अंदरूनी इलाके में स्थित श्री गुरु अर्जन देव जी की शहादत से संबंधित 'लाल कूंह' और 'कट्टड़ी चंदू' स्थलों की वर्तमान स्थिति की जांच करवाने की मांग की है। यह पत्र पंजाब सरकार के मंत्री और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा को भी संबोधित किया गया है। जत्थेदार गर्गज ने स्पष्ट किया कि इस पत्र का उद्देश्य किसी सरकार, संगठन या व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि लाहौर की उस साझी ऐतिहासिक विरासत की ओर ध्यान आकर्षित करना है, जिससे सिख इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय जुड़े हुए हैं।ऐतिहासिक स्थलों के क्षरण पर जताई चिंताजत्थेदार ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि लाहौर सिख इतिहास के लिए कोई बाहरी स्थान नहीं है। यह वह धरती है जहां सिख गुरु साहिबान की यादें, सिख शहीदों की कुर्बानियां और गुरसिख परंपरा के अनेक अध्याय अपनी भौतिक निशानियों के साथ मौजूद रहे हैं। हालांकि, समय के बदलाव, शहरी विकास, पंजाब के विभाजन और अन्य ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण इनमें से कई निशानियां या तो समाप्त हो चुकी हैं या अपनी मूल स्थिति में नहीं रही हैं। इस कारण वर्तमान में शेष बची ऐतिहासिक निशानियों का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने पश्चिमी पंजाब में ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिबान के रखरखाव और उन्हें पुनः खोलने के लिए पाकिस्तान की पंजाब सरकार द्वारा विशेष कोष जारी करने के प्रयासों की सराहना की।निर्माण कार्यों पर रोक और जांच की मांगजत्थेदार गर्गज ने बताया कि सिख संगतों के माध्यम से श्री अकाल तख्त साहिब के संज्ञान में यह बात आई है कि लाल कूंह और कट्टड़ी चंदू स्थल के आसपास निर्माण संबंधी गतिविधियां चल रही हैं, जो सिख समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस मामले की आधिकारिक तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अकाल तख्त साहिब की ओर से पाकिस्तान सरकार को निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:तत्काल जांच व निर्माण पर रोक: लाल कूंह और कट्टड़ी चंदू स्थल की वर्तमान स्थिति की तुरंत जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के निर्माण या बदलाव कार्य पर तुरंत रोक लगाई जाए।विशेषज्ञ समिति का गठन: 'वॉल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी' (Walled City of Lahore Authority), पुरातत्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों के विशेषज्ञों के माध्यम से इस स्थान के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व की पड़ताल कराई जाए।सिख प्रतिनिधियों की भागीदारी: जांच प्रक्रिया में सिख इतिहास के विशेषज्ञों और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। विरासत स्थल के रूप में दर्ज करना: यदि जांच में इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व साबित होता है, तो इसे कानूनी रूप से संरक्षित विरासत स्थल के रूप में पंजीकृत करने की आवश्यक कार्रवाई की जाए। व्यापक सर्वेक्षण: लाहौर के अंदरूनी शहर में सिख इतिहास से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाए और उनकी वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, स्वामित्व व कानूनी स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। जत्थेदार ने जोर देकर कहा कि यदि किसी ऐतिहासिक स्थल की आज केवल एक छोटी सी निशानी ही बची है, तो उसका मूल्य केवल उसकी भौतिक संरचना के आधार पर नहीं, बल्कि उससे जुड़ी ऐतिहासिक स्मृति के आधार पर तय होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और की गई कार्रवाई की जानकारी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) तथा श्री अकाल तख्त साहिब के साथ साझा करेगी।
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