गुरप्रीत कौर मानहानि मामला: कोर्ट का अंतरिम आदेश, मजीठिया, खैरा और पूर्व जस्टिस रंजीत सिंह को नोटिस जारी

गुरप्रीत कौर मानहानि मामला: कोर्ट का अंतरिम आदेश, मजीठिया, खैरा और पूर्व जस्टिस रंजीत सिंह को नोटिस जारी

चंडीगढ़ की एक अदालत ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर के खिलाफ रिश्वत मांगने के कथित आरोपों से जुड़ी बेबुनियाद और अपमानजनक सामग्री सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर प्रकाशित करने तथा प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने यह रोक सेवानिवृत्त जस्टिस रंजीत सिंह, शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा पर अगले आदेश तक लागू की है। चंडीगढ़ के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) डॉ. परीक्षित की अदालत ने मुख्यमंत्री की पत्नी गुरप्रीत कौर द्वारा हर्जाने और स्थायी आदेश की मांग को लेकर दायर दीवानी मुकदमे पर यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही अदालत ने मुख्य मुकदमे और स्टे आवेदन पर प्रतिवादियों को 30 सितंबर 2026 के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने मामले में एकतरफा (एक-पक्षीय) सुनवाई और अंतरिम आदेश जारी करने की अपील की। वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में एक मजबूत प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेसी) मामला बनता है तथा सुविधा का संतुलन भी उनके पक्ष में है। यदि तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो याचिकाकर्ता की छवि को ऐसा नुकसान पहुंचेगा जिसकी भरपाई किसी भी तरह संभव नहीं होगी। अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता राज्य के मुख्यमंत्री की पत्नी होने के साथ-साथ एक योग्य मेडिकल पेशेवर भी हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रतिवादी संख्या 2, पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजीत सिंह ने 20 अगस्त 2026 को बलात्कार के एक मामले में आरोपी से 5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के निराधार आरोप लगाए थे। इस सामग्री को याचिकाकर्ता की छवि धूमिल करने के इरादे से 'DD News Live' के एक्स (X) हैंडल पर पोस्ट किया गया। जस्टिस रंजीत सिंह के प्रतिवादी संख्या 4 सुखपाल सिंह खैरा के साथ करीबी संबंध बताए गए हैं, जो याचिकाकर्ता के पति के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि प्रतिवादी संख्या 1 भावना नायर ने समाचार चैनलों पर इसे सनसनीखेज खबर के रूप में पेश किया, जिसे बाद में @DDNewsLive के माध्यम से एक्स पर साझा किया गया। इस पोस्ट को 74,000 से अधिक लोगों ने देखा और करीब 75 बार शेयर किया गया। इसके अलावा, बिक्रम सिंह मजीठिया ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर याचिकाकर्ता की छवि खराब करने का अभियान चलाया, जिसका प्रसारण एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर भी अपलोड किया गया। याचिकाकर्ता द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद इन बयानों को वापस नहीं लिया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता प्रथम दृष्टया मामला साबित करने में सफल रही हैं। वर्तमान में प्रतिवादियों द्वारा की गई पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें किसी ठोस सबूत पर आधारित प्रतीत नहीं होतीं। अदालत ने माना कि प्रतिवादियों ने बिना किसी पुष्टि के ऐसी सामग्री पोस्ट की, क्योंकि जिस व्यक्ति पर मध्यस्थता का आरोप लगाया गया था, वह भी बाद में मुकर (होस्टाइल हो) चुका है। अदालत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसकी गरिमा का अभिन्न अंग है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को सम्मान के अधिकार के साथ संतुलित करना आवश्यक है। याचिकाकर्ता एक प्रमुख सार्वजनिक हस्ती हैं, इसलिए असत्यापित आरोपों से उन्हें अपूरणीय क्षति हो सकती है। इन तर्कों के आधार पर अदालत ने प्रतिवादियों को ऐसी किसी भी अपमानजनक सामग्री को पोस्ट या शेयर करने से अस्थायी रूप से रोक दिया। वहीं, विवादित पोस्ट और वीडियो को हटाने (डिलीट करने) संबंधी अर्जी पर अदालत ने प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के लिए नोटिस जारी करना उचित समझा।