मध्य पूर्व तनाव से बासमती निर्यात पर संकट, व्यापारियों में चिंता
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर पंजाब और हरियाणा के बासमती व्यापार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पश्चिम एशिया, यूरोप और अमेरिका सहित कई देशों को निर्यात करने वाले व्यापारी इस समय अनिश्चितता और डर के माहौल में काम कर रहे हैं। पंजाब से बासमती चावल के अलावा होजरी, ऑटो पार्ट्स और हैंड टूल्स का भी निर्यात किया जाता है। इस तनाव का सीधा प्रभाव भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे बासमती व्यापार पर पड़ सकता है। देश से निर्यात होने वाले कुल बासमती में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले पंजाब का है और ईरान भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने अपने सदस्यों को खाड़ी देशों के लिए नए निर्यात समझौते न करने की सलाह दी है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2003 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा पूसा बासमती 1121 के व्यावसायिक जारी होने के बाद ईरान को निर्यात में तेजी आई थी और यह आंकड़ा एक समय 15 लाख मीट्रिक टन सालाना तक पहुंच गया था। इसके चलते पंजाब और हरियाणा में बासमती की खेती का रकबा भी बढ़ा। हालांकि वर्तमान तनाव के कारण भारत से ईरान को सीधी शिपमेंट धीमी हो गई है और निर्यातकों को दुबई के जेबेल अली बंदरगाह के पुराने मार्ग पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पिछले तीन महीनों में करीब तीन लाख मीट्रिक टन बासमती इसी रास्ते से ईरान भेजी गई, लेकिन अब यह आवाजाही भी रुकने की आशंका है। निर्यातकों के लगभग 4 से 5 हजार करोड़ रुपये के भुगतान फंसे हुए हैं, जिनके डूबने का खतरा भी बढ़ गया है। बासमती चावल मिलर्स और एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बाल किशन बाली और उपाध्यक्ष रणजीत सिंह जोसन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय हमलों के बाद ईरान, यूएई, कतर और कुवैत सहित कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, जिससे अनाज की ढुलाई प्रभावित हुई है। बैंकिंग चैनलों में बाधाएं, अंतरराष्ट्रीय भुगतान में देरी और लाल सागर व हरमुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण माल भाड़ा और बीमा दरों में भी वृद्धि की संभावना है। निर्यातकों ने केंद्र सरकार से वित्तीय और नीतिगत सुरक्षा उपायों की मांग की है। मुद्रा अस्थिरता भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है, क्योंकि पूर्व में प्रतिबंधों के दौरान ईरानी मुद्रा में भारी गिरावट के चलते भुगतान अटकने के मामले सामने आए थे। सूत्रों के अनुसार, ईरान की सरकारी ट्रेडिंग कंपनी ने हाल ही में भारतीय निर्यातकों से करीब 1.60 लाख टन बासमती खरीदने के निर्देश दिए हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए भारत से इस आपूर्ति को लेकर संकोच किया जा रहा है। निर्यातक विकास जैन ने बताया कि ईरान-इजराइल तनाव के चलते अधिकांश व्यापारी असमंजस में हैं और उन्हें भेजी जा रही खेपों के भविष्य को लेकर चिंता है। दूसरी ओर, खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों के परिवार भी चिंतित हैं। अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दोहा और दुबई के लिए कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हरियाणा और चंडीगढ़ के कई परिवार दुबई में फंसे हुए हैं। बठिंडा की एक कॉलेज प्रिंसिपल नीरू गर्ग, जो 23 फरवरी को अपने परिवार के साथ दुबई गई थीं, अभी तक वापस नहीं लौट सकी हैं और उन्होंने भारत सरकार से सुरक्षित वापसी की अपील की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ईरान में इस समय 10,765 भारतीय, इराक में 17,100, सऊदी अरब में 27.47 लाख, यूएई में 38.97 लाख और ओमान में 6.62 लाख भारतीय मौजूद हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ जाती है।
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