बिना ठोस सबूत युवाओं की गिरफ्तारी पर पंजाब पुलिस सख्त, 17 सूत्रीय निर्देश जारी
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद पंजाब पुलिस ने युवाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साफ-सुथरी पृष्ठभूमि वाले युवाओं के खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई केवल स्पष्ट और निष्पक्ष सबूतों के आधार पर ही की जाएगी। पुलिस द्वारा जारी 17 बिंदुओं वाले इस सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसे युवाओं की पहचान मीडिया में उजागर नहीं की जाएगी। इसके अलावा, जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, उनके शैक्षणिक संस्थानों या नियोक्ताओं को जांच के बारे में सूचित नहीं किया जाएगा। यह कदम विशेष रूप से 18 से 20 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि जांच के दौरान उन्हें सार्वजनिक पहचान, संस्थागत नुकसान और शैक्षणिक बाधाओं से बचाया जा सके। सर्कुलर 3 अप्रैल का है और इसे एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि जांच की प्रक्रिया पहली बार संदेह के दायरे में आए युवाओं के लिए स्वयं सजा न बन जाए। इसके तहत मीडिया को पहचान उजागर करने से रोका गया है और शैक्षणिक संस्थानों या नियोक्ताओं को सूचित करने के लिए कानूनी आवश्यकता या अदालत के विशेष निर्देशों को अनिवार्य बताया गया है। डिजिटल और शैक्षणिक जीवन की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। सर्कुलर में निर्देश है कि निजी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती केवल आवश्यक डेटा निकालने तक सीमित हो और उन्हें जल्द से जल्द वापस कर दिया जाए, ताकि पढ़ाई और पेशेवर गतिविधियों में बाधा न आए। इसके साथ ही, पुलिस थानों में पेशी के समय अंतराल को भी संतुलित रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कक्षाओं, परीक्षाओं और करियर पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हिरासत में पूछताछ केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही की जाए। यदि आरोपी जांच में सहयोग करता है और दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो हिरासत की आवश्यकता नहीं मानी जाएगी। हिरासत की जरूरत होने पर उसके कारणों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के “अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य” मामले के सिद्धांतों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि केवल संज्ञेय अपराध होने के आधार पर गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। गिरफ्तारी से पहले उसके औचित्य को दर्ज करना और नोटिस प्रक्रिया को प्राथमिकता देना आवश्यक बताया गया है। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि किसी व्यक्ति को केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर आरोपी नहीं बनाया जा सकता, जब तक कि उसके समर्थन में स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध न हों। ऐसे बयानों को कमजोर साक्ष्य माना गया है। जांच अधिकारियों को मोबाइल, व्हाट्सएप संचार, लोकेशन डेटा सहित अन्य भौतिक साक्ष्य एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, गिरफ्तारी, तलाशी या जब्ती से पहले व्यक्ति के आपराधिक इतिहास की अनुपस्थिति का सत्यापन करना भी अनिवार्य किया गया है। निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इन मामलों की समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समीक्षा की जाएगी। यदि समीक्षा में साक्ष्य अपर्याप्त पाए जाते हैं, तो बिना देरी के नाम हटाने या केस बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट के समक्ष यह चिंता जताई गई थी कि युवाओं को अनावश्यक रूप से आपराधिक मामलों में शामिल करने से उनके भविष्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। इन दिशा-निर्देशों के माध्यम से पुलिस ने संतुलित, संवेदनशील और अधिकार-आधारित जांच प्रक्रिया लागू करने की दिशा में कदम उठाया है। इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रक्रिया किसी भी निर्दोष या पहली बार संदेह के घेरे में आए युवा के लिए दंड के समान न बन जाए और उनके भविष्य की सुरक्षा बनी रहे।
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