मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कार्यमुक्त करने और SIT जांच की मांग
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद के कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने और निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह द्वारा दायर की गई अर्जी (राकेश कुमार सिंह के माध्यम से) पर जल्द सुनवाई का अनुरोध स्वीकार करते हुए यह फैसला लिया। जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की सदस्यता वाली पीठ के समक्ष दलील रखते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है। कानूनी प्रावधानों के तहत आयोग के सभी निर्णय यथासंभव सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और यदि कोई मतभेद हो, तो फैसला बहुमत के आधार पर होना चाहिए। हालांकि, अदालत को अवगत कराया गया कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) जैसे गंभीर मुद्दों पर बाकी दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और लिखित विरोध के बावजूद एकतरफा फैसले लिए गए। याचिका में अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के लिखित ऐतराज दर्ज कराने के बावजूद चुनाव आयोग के नाम पर लगभग 14 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इन तथ्यों के आधार पर याचिका में मांग की गई है कि ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयुक्त के रूप में काम करने से रोका जाए, मामले की सुनवाई लंबित रहने तक उन्हें निलंबित किया जाए और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जाए। इसके अतिरिक्त, याचिका में शीर्ष अदालत से यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि फॉर्म-6 और मतदाता सूची डेटा सिस्टम (ERNOet/ECINet) में कोई भी ऐसा बदलाव न किया जाए, जिससे योग्य नागरिकों के नाम मतदाता सूची से बाहर हों। उल्लेखनीय है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह दूसरी याचिका है; इससे पहले अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा भी एसआईआर के दौरान कथित तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में आपराधिक कार्रवाई और न्यायिक जांच की मांग की गई थी।
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