पंजाब में निष्क्रिय यूथ क्लबों पर गिरी गाज, 'युवा सेवाएं विभाग' ने रद्द की 15,000 क्लबों की मान्यता

पंजाब में निष्क्रिय यूथ क्लबों पर गिरी गाज, 'युवा सेवाएं विभाग' ने रद्द की 15,000 क्लबों की मान्यता

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भगवंत मान सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य भर के करीब 15 हजार यूथ क्लबों की मान्यता रद्द कर दी है। युवा सेवाएं विभाग (Department of Youth Services) की जिला स्तरीय समन्वय समितियों ने 'यूथ क्लब एफिलिएटेड पॉलिसी 2025' के तहत समीक्षा करने के बाद यह कार्रवाई की है। हालांकि, जहां एक तरफ पुराने और निष्क्रिय क्लबों को रद्द कर दिया गया है, वहीं गांवों में नए यूथ क्लबों के गठन को लेकर युवाओं की ओर से खास प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिल रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. Source: Hindustan Times / Hindustan Times via Getty Images 700 क्लब ही पाए गए सक्रिय प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला स्तरीय समन्वय समितियों ने युवा सेवाएं विभाग से जुड़े लगभग 15,500 यूथ क्लबों को सार्वजनिक नोटिस जारी कर पिछले तीन वर्षों का प्रदर्शन (परफॉरमेंस) रिपोर्ट 45 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का अवसर दिया था। इस समीक्षा प्रक्रिया के दौरान जब जांच की गई तो इनमें से मात्र 700 यूथ क्लब ही सक्रिय पाए गए। इसके बाद विभागीय नियमों के आधार पर बाकी सभी निष्क्रिय क्लबों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। नए क्लब बनाने की गति धीमी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा गांवों में नए यूथ क्लब गठित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक अब तक पूरे राज्य में केवल 600 नए क्लब ही बन सके हैं। स्थिति यह है कि मानसा, मलेरकोटला, बठिंडा, पठानकोट और फाजिल्का—इन 5 जिलों में अब तक एक भी नया यूथ क्लब पंजीकृत नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, वर्षों से ग्रामीण स्तर पर काम कर रहे पुराने क्लबों का अस्तित्व अब समाप्त हो गया है। जिलावार आंकड़े और पृष्ठभूमि विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो फिरोजपुर जिले में लगभग 1,250 यूथ क्लब थे, जिनमें से करीब 1,200 रद्द कर दिए गए हैं। इसी तरह होशियारपुर जिले में 950 क्लब रद्द किए गए और वहां केवल 32 नए क्लब ही अस्तित्व में आ सके। बठिंडा जिले के 510 यूथ क्लबों में से 450 क्लबों को रद्द कर दिया गया है। युवा सेवाएं विभाग का कहना है कि यह कदम केवल उन क्लबों पर उठाया गया है जो लंबे समय से निष्क्रिय थे। उल्लेखनीय है कि पंजाब में 1997 के बाद से ही ग्रामीण स्तर पर सक्रिय यूथ क्लबों पर राजनीतिक प्रभाव देखा जाता रहा है।