महर्षि वाल्मीकि जयंती पर पीएम मोदी ने देशवासियों को दी बधाई; बोले— 'उनके विचार हर युग में राष्ट्र का मार्गदर्शन करेंगे'

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर पीएम मोदी ने देशवासियों को दी बधाई; बोले— 'उनके विचार हर युग में राष्ट्र का मार्गदर्शन करेंगे'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि के बहुमूल्य योगदान को रेखांकित किया और मानवता के लिए उनके संदेशों को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शाश्वत मार्गदर्शक बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जारी एक संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, "महर्षि वाल्मीकि जयंती के शुभ अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई। उनके उच्च और महान विचार भारतीय संस्कृति एवं विरासत का आधार रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र के विकास और पोषण में योगदान देते रहेंगे। मानवता के लिए उनका संदेश देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।" केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने भी दी श्रद्धांजलि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी महर्षि वाल्मीकि जी को नमन करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में गडकरी ने लिखा कि महाकाव्य 'रामायण' के रचयिता और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर वे उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हैं और सभी देशवासियों को बधाई देते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'रामायण' के माध्यम से स्थापित नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा, "आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी ने 'रामायण' के जरिए भगवान श्री राम के चरित्र और सनातन संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को हर व्यक्ति तक पहुंचाया। भगवान राम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य पालन का जीवंत प्रतीक है, जो आज भी संपूर्ण मानवता को धर्म और लोक-कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।" दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी महर्षि वाल्मीकि जी की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी दिव्य रचना से भगवान श्री राम की महिमा, सत्य और मर्यादा के महान आदर्शों को आने वाले युगों के लिए अमर कर दिया है। साहित्यिक और आध्यात्मिक विरासत महर्षि वाल्मीकि जयंती संस्कृत साहित्य के प्रथम कवि (आदिकवि) महर्षि वाल्मीकि जी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने प्रसिद्ध भारतीय महाकाव्य 'रामायण' की रचना की थी। उनकी साहित्यिक और आध्यात्मिक देन भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं में आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है।