ऑडियो रिकॉर्डिंग से खुला मामला, CBI ने एयरपोर्ट अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की FIR
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के दायरे में आ गए हैं। सीबीआई की एंटी-करप्शन ब्रांच ने चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CHIAL) के तत्कालीन CEO राकेश रंजन सहाय और कमर्शियल विभाग के प्रमुख अमृत गर्ग के खिलाफ जबरन वसूली, आपराधिक साजिश और रिश्वतखोरी के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की है। दर्ज एफआईआर के अनुसार, दोनों अधिकारियों पर टैक्सी यूनियन के सदस्यों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशान करने, उनसे जबरन पैसे वसूलने और एक विशेष लाइसेंसधारी को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला वर्ष 2021 से कथित रूप से चल रही गतिविधियों से जुड़ा बताया गया है। शिकायत और पेन ड्राइव से शुरू हुई जांच इस पूरे मामले का खुलासा 26 अप्रैल 2024 को हुआ, जब टैक्सी यूनियन ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को एक लिखित शिकायत के साथ एक पेन ड्राइव सौंपी। इस पेन ड्राइव में अधिकारियों की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल थीं। एएआई की विजिलेंस टीम ने प्रारंभिक जांच के दौरान रिकॉर्ड और ऑडियो क्लिप में लगाए गए आरोपों में कुछ सच्चाई पाई। इसके बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने ऑडियो की फोरेंसिक जांच और पैसों के लेन-देन की गहन जांच के लिए मामला सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए। संयुक्त परियोजना है एयरपोर्ट गौरतलब है कि यह एयरपोर्ट एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की 51 प्रतिशत, पंजाब सरकार की 24.5 प्रतिशत और हरियाणा सरकार की 24.5 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला संयुक्त उपक्रम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर 2015 को इस एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। बाद में 28 सितंबर 2022 को इसका नाम बदलकर ‘शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखा गया। फोरेंसिक जांच की तैयारी सीबीआई के डीएसपी प्रकाश चंद इस मामले की जांच कर रहे हैं। आने वाले दिनों में ऑडियो क्लिप की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि अधिकारियों की आवाज की पुष्टि की जा सके। इसके अलावा कार्यालय रिकॉर्ड और ई-मेल की भी जांच की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपित अधिकारियों की गिरफ्तारी भी संभव है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि किसी टैक्सी यूनियन की शिकायत के आधार पर किसी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई के मामले बहुत कम सामने आते हैं।
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