भारत ने पश्चिम एशिया में तत्काल शांति की वकालत की, मोदी-ट्रंप में चर्चा

भारत ने पश्चिम एशिया में तत्काल शांति की वकालत की, मोदी-ट्रंप में चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संकट पर विस्तृत चर्चा की। बातचीत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत क्षेत्र में तत्काल शांति बहाली और तनाव कम करने के पक्ष में है। दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा का मुख्य फोकस होर्मुज जलमार्ग को जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर रहा। साथ ही, क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के प्रयासों पर भी जोर दिया गया। यह बातचीत उस समय हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को जलमार्ग खोलने के लिए पांच दिन का समय दिया है और उसके बाद ताजा घटनाक्रम की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि दोनों नेताओं ने भविष्य में भी एक-दूसरे के संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई है। दूसरी ओर, ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने अमेरिका की वार्ता संबंधी बातों को खारिज कर दिया है। ईरानी सेना की शीर्ष कमान खातम-अल-अनबिया के प्रवक्ता मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही आलियाबादी ने कहा कि उनकी सेना पूर्ण जीत हासिल होने तक युद्ध जारी रखेगी। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत के लिए तैयार नहीं है। पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालातों के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से किसी भी संभावित स्थिति के लिए तैयार रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और सरकार सभी पहलुओं पर नजर बनाए हुए है। सरकार ने इस संकट के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए विशेष अधिकारों वाले सात समूह गठित करने की घोषणा की है। ये समूह ईंधन, उर्वरक, गैस, आपूर्ति श्रृंखला और महंगाई जैसे मुद्दों पर रणनीति तैयार करेंगे। प्रधानमंत्री ने राज्यों से ‘टीम इंडिया’ के तहत केंद्र के साथ मिलकर काम करने की अपील की है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सरकार ने बुधवार शाम पांच बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। हालांकि, विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले से निर्धारित कार्यक्रम के कारण इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका भारत के लिए महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने राज्यों को कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।