अमेरिका-इज़राइल का ईरान पर बड़ा हमला, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
- अंतरराष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला जारी है, जिससे पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई को “बड़ी सैन्य मुहिम” बताते हुए ईरानी जनता से अपनी किस्मत का नियंत्रण अपने हाथ में लेने और 1979 से सत्ता में मौजूद इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया है। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई के दफ्तर के आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया ने देशभर में हमलों की पुष्टि की है, जबकि राजधानी तेहरान से धुएं के गुबार उठते देखे गए। ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में कहा कि जब यह कार्रवाई पूरी हो जाएगी, तब ईरानी जनता अपनी सरकार खुद संभाले। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अहम अवसर बताया। वहीं इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस संयुक्त ऑपरेशन का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम ईरान के लोगों को अपनी किस्मत तय करने का मौका देगा। यह कार्रवाई पिछले आठ महीनों में दूसरी बार है जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ सैन्य शक्ति का उपयोग किया है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पहले इज़राइल की ओर मिसाइलों और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू की। इसके बाद बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश अपनी रक्षा के लिए किसी भी कदम से पीछे नहीं हटेगा। ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार दक्षिणी ईरान के मिनाब क्षेत्र में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में 40 छात्राओं की मौत हो गई। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात और इराक ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। इज़राइल का कहना है कि यह अभियान महीनों की योजना के बाद शुरू किया गया है और इसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं, सरकारी ढांचे और खुफिया ठिकानों को निशाना बनाना है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखे हुए है और ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने अमेरिकी नुकसान की आशंका भी जताई और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से हथियार डालने की अपील की। इस बीच, हालात को देखते हुए कतर, यूएई और इज़राइल में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने अपने नागरिकों और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ असुरक्षित होता है, तो इसका वैश्विक बाजारों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी लाल सागर और इज़राइल पर हमले फिर से शुरू करने की चेतावनी दी है।
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