GRSE ने लॉन्च किया भारत का पहला स्वदेशी समुद्री शोध पोत 'सागर मंथन'
रक्षा मंत्रालय के तहत नवरत्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड ने बुधवार को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राष्ट्रीय ध्रुवीय और समुद्री अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए 'सागर मंथन' नामक समुद्री अनुसंधान पोत (ORV) को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। यह भारत में निर्मित अपनी तरह का पहला स्वदेशी ओशन रिसर्च वेसल (ORV) है। इस जहाज का लॉन्च इसकी 'कील लेइंग' (Keel Laying) के महज पांच महीने के भीतर हुआ है, जो GRSE की समयसीमा का पालन करने की उच्च क्षमता को दर्शाता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, जिन्हें वर्चुअली मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होना था, अपरिहार्य कारणों से उपस्थित नहीं हो सके। हालांकि, उन्होंने एक विशेष संदेश भेजकर GRSE और NCPOR दोनों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी। मंत्री ने अपने संदेश में बताया कि यह शोध पोत वर्ष 2028 तक भारत के गहरे समुद्र में अनुसंधान (Deep Sea Exploration) अभियानों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कोलकाता स्थित GRSE के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में आयोजित इस समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुमाला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए सचिव डॉ. तुमाला, जो स्वयं एक प्रसिद्ध समुद्र विज्ञानी हैं, ने देश के विकास में समुद्री अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर GRSE के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सीएमडी सीएमडीई पी.आर. हरि (सेवानिवृत्त) ने कहा, "हम रक्षा मंत्रालय के लिए एक मरीन एकोस्टिक रिसर्च वेसल (ARV) और दो तटीय अनुसंधान पोत (CRV) का भी निर्माण कर रहे हैं। अब तक हम कहते थे कि GRSE ने युद्धपोतों के निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, लेकिन अब से हम गर्व से कह सकते हैं कि GRSE ने युद्धपोतों के साथ-साथ विशेष प्रकार के जहाजों के क्षेत्र में भी पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है।" तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो 89.50 मीटर लंबे और 18.80 मीटर चौड़े इस ओशन रिसर्च वेसल का कुल वजन (Gross Tonnage) 5,900 टन होगा। यह 90 प्रतिशत मैक्सिमम कंटीन्यूअस रेटिंग (MCR) पर 14 नॉट्स की गति से चलने में सक्षम होगा। डिलीवरी मिलने के बाद, 'सागर मंथन' तटीय समुद्रों के साथ-साथ 6 किलोमीटर की अधिकतम गहराई तक गहरे पानी में अंडरवे स्वाथ मल्टीबीम सर्वेक्षण और भू-भौतिकीय भूकंपीय (Geophysical Seismic) सर्वेक्षण करने में पूरी तरह सक्षम होगा। इसके अलावा, यह वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल तरीकों का उपयोग करके पानी के तापमान, चालकता और गहराई (CTD) की प्रोफाइलिंग तथा जैविक नमूनों को एकत्र करने जैसे कार्य भी कर सकेगा। यह अत्याधुनिक शोध पोत सतह और गहरे समुद्र में मूरिंग तथा डेटा बॉय ऑपरेशन्स, कोरर्स और ग्रैब्स के जरिए समुद्र की तलहटी के नमूने लेने और चेन बैग ड्रेज से चट्टानों की ड्रेजिंग करने में सक्षम होगा। इसके अतिरिक्त, जहाज चलते हुए वायुमंडलीय अवलोकन, सतह के मौसम विज्ञान और समुद्री धाराओं के मापन के साथ-साथ ऊपरी वायुमंडल के डेटा एकत्र करने का कार्य भी करेगा। जहाज पर वैज्ञानिक विश्लेषणात्मक कार्य और डेटा प्रोसेसिंग कर सकेंगे, साथ ही यह पोत युवा वैज्ञानिकों और तकनीशियनों के लिए प्रशिक्षण व शिक्षा केंद्र का कार्य भी करेगा। गौरतलब है कि सर्वे जहाजों के निर्माण में GRSE के पास व्यापक अनुभव है और वह लगभग चार दशकों से भारतीय नौसेना के लिए इनका निर्माण कर रहा है। GRSE ने 80 के दशक में नौसेना को सर्वे पोत सौंपे थे। इसके अलावा, 1994 में नौसेना भौतिक और समुद्र विज्ञान प्रयोगशाला (NPOL) के लिए मरीन एकोस्टिक रिसर्च वेसल 'INS सागरध्वनि' का निर्माण भी किया गया था। इस जहाज को वर्ष 2025 में GRSE द्वारा रीफर्बिश किया गया था। सीएमडी ने यह भी जानकारी दी कि NPOL के लिए एक नया एआरवी तैयार किया जा रहा है जिसका नाम 'सागर स्पंदन' रखा जाएगा।
Posted By: Daily Suraj Bureau