संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा हमला, तीन युद्ध और आतंकी हमलों का आरोप
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से स्थगित करने के अपने फैसले का बचाव किया है। भारत ने इस दौरान पाकिस्तान पर तीन युद्ध छेड़ने और हजारों आतंकी हमलों को अंजाम देने का आरोप लगाया। ‘विश्व जल दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश परवथानेनी ने पाकिस्तान को जवाब देते हुए कहा कि दशकों से जारी सीमा पार आतंकवाद के कारण भारत का धैर्य समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि लगातार शत्रुतापूर्ण माहौल में 1960 की सिंधु जल संधि को बनाए रखना संभव नहीं है। अपने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का उपयोग करते हुए परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ तीन युद्ध और हजारों आतंकी हमले कर इस संधि की भावना का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमलों में हजारों निर्दोष भारतीयों की जान गई है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने सिंधु जल संधि को सद्भावना और मित्रता की भावना से स्वीकार किया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसे तब तक स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के सभी रूपों का समर्थन पूरी तरह और विश्वसनीय रूप से बंद नहीं कर देता। भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच का उपयोग द्विपक्षीय मुद्दों को उठाने के लिए किया, जिससे भारत को जवाब देना पड़ा। उन्होंने कहा कि छह दशक पहले हस्ताक्षरित यह संधि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने तकनीकी प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता, जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या में वृद्धि जैसे कारकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन बदलावों के मद्देनजर संधि की समीक्षा आवश्यक है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारत द्वारा संधि में संशोधन के लिए की गई सभी पहल को पाकिस्तान ने खारिज कर दिया। भारत ने स्वयं को एक “जिम्मेदार अपस्ट्रीम देश” बताते हुए कहा कि यह भूमिका तभी संभव है जब पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करना बंद करे। अंत में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को संधियों की पवित्रता की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।
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