अकाली दल वारिस पंजाब का विरोध प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के खिलाफ बेअदबी का मामला दर्ज करने की मांग
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जुड़ी एक कथित विवादित वीडियो को लेकर पंजाब में विरोध प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं। इसी क्रम में बरनाला के कचहरी चौक में अकाली दल वारिस पंजाब के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला फूंककर पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त (डीसी) बरनाला को एक ज्ञापन भी सौंपा। इस अवसर पर संगठन के जिला अध्यक्ष गुरविंदर सिंह गिंदी ने बताया कि करीब तीन-चार महीने पहले मुख्यमंत्री से संबंधित एक वीडियो सार्वजनिक हुई थी। उन्होंने कहा कि इस वीडियो की जांच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से मणिपुर की मान्यता प्राप्त फोरेंसिक लैब में कराई गई। प्रदर्शनकारियों के अनुसार लैब की रिपोर्ट में यह सामने आया कि वीडियो के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई और न ही इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से तैयार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री अपने पहले दिए गए बयानों से पीछे हट रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें और उनके खिलाफ बेअदबी से संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज किया जाए। इस दौरान संगठन के नेता गुरमीत सिंह ने आरोप लगाया कि कथित वीडियो में मुख्यमंत्री द्वारा सिख गुरु साहिबानों की तस्वीरों और कौमी शहीद संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले के पोस्टरों का अपमान किया गया है, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में जल्द कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अमृतसर में भी हुआ विरोध प्रदर्शन अमृतसर में भी अकाली दल वारिस पंजाब की ओर से इसी विवादित वीडियो मामले को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ प्रदर्शन किया गया और उनका पुतला जलाया गया। संगठन ने पंजाब के सभी जिलों के उपायुक्तों के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई, स्वतंत्र न्यायिक जांच और नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। पार्टी नेताओं का कहना है कि विवादित वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री इसे झूठा, संपादित और राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताते रहे। हालांकि उनका दावा है कि श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार हुई फोरेंसिक जांच रिपोर्टों में वीडियो के साथ किसी प्रकार की एडिटिंग, टैंपरिंग या डीपफेक तकनीक के इस्तेमाल के प्रमाण नहीं मिले हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना और जवाबदेही तय करना आवश्यक है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सिख धर्म में गुरु साहिबानों, भगतों, शहीदों और महापुरुषों का सर्वोच्च सम्मान है। इसलिए धार्मिक भावनाओं से जुड़े किसी भी मामले में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो, कानून और जांच से ऊपर नहीं हो सकता। संगठन ने मांग की कि उपलब्ध तथ्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में तत्काल मामला दर्ज किया जाए। साथ ही, इस पूरे प्रकरण की जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से कराई जाए। जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की भी मांग की गई।
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