बरनाला में विरासत पेड़ों की कटाई पर NGT सख्त, मुख्य सचिव सहित अधिकारियों को नोटिस
- पंजाब
- (Asia/Kolkata)
बरनाला शहर में बड़ी संख्या में विरासत पेड़ों की कथित अवैध कटाई के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में पंजाब के मुख्य सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जिन अधिकारियों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के प्रमुख सचिव, विभाग के निदेशक, बरनाला के डिप्टी कमिश्नर, वरिष्ठ वन अधिकारी, इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के पदाधिकारी, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सहित अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं। यह कार्रवाई गांव काहनेके निवासी गुरप्रीत सिंह द्वारा दायर याचिका पर की गई, जिस पर ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट, बरनाला के अधिकारियों ने अन्य विभागों के साथ कथित मिलीभगत कर शहर में फव्वारा चौक के निकट लगभग 140 पुराने पेड़ों को उखाड़ दिया। इनमें से कुछ पेड़ों की उम्र 50 वर्ष से अधिक बताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कटे गए पेड़ों में नीम, बरगद, पीपल, शहतूत, सागवान, कीकर, ताहली और जंड जैसी पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल थीं। याचिका में यह भी कहा गया कि इस कार्रवाई के दौरान भारी मशीनरी का उपयोग किया गया, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के कारण बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा, धनेर, बख्तगढ़ और बदरा गांवों तथा बरनाला शहर की पुड्डा मार्केट में पेड़ों की कटाई के मामलों को भी ट्रिब्यूनल ने संज्ञान में लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, चंडीगढ़ स्थित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय और पंजाब के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (पीसीसीएफ) के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति का गठन किया है। पीसीसीएफ को इस समिति का नोडल एजेंसी बनाया गया है। समिति को स्थल का दौरा कर आरोपों की जांच करने, काटे गए पेड़ों की वास्तविक संख्या निर्धारित करने, जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने और सुधारात्मक तथा दंडात्मक कार्रवाई के संबंध में सिफारिशें देने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को निर्धारित की गई है।
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