चक्रवाती तूफान 'अरनब' का आंध्र प्रदेश में तांडव: 150 किमी/घंटे की रफ्तार से चलीं हवाएं, तटीय इलाकों में अलर्ट
- राष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
गंभीर चक्रवाती तूफान 'अरनब' (Cyclone Arnab) के आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से टकराने (लैंडफॉल) की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है, जिसके चलते राज्य के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही देखने को मिल रही है। तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में उठ रही ऊंची लहरों के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस चक्रवाती तूफान का केंद्र आंध्र प्रदेश और यनम के तटों के निकट स्थित है। अमरावती मौसम केंद्र की निदेशक डॉ. के. नागग्रत्ना ने जानकारी दी कि तटीय इलाकों में 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल रही हैं, जिनकी रफ्तार बढ़कर 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। काकीनाडा और यनम के तटों पर समुद्र में 2.5 मीटर तक ऊंची लहरें उठ रही हैं, जिससे निचले इलाकों में समुद्री पानी भरने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। तूफान के प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने बापतला, गुंटूर, कृष्णा, विशाखापत्तनम, पूर्वी गोदावरी और पश्चिमी गोदावरी सहित 16 जिलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने का अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनजर विशाखापत्तनम के प्रसिद्ध आर.के. बीच पर आवाजाही रोक दी गई है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है। शहर में कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए हैं तथा विजयवाड़ा में मूसलाधार बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गई हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि राज्य प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रभावित लोगों की सहायता के लिए राज्य में 2,199 चक्रवात राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। राहत और बचाव कार्यों को अंजाम देने के लिए 14 जिलों में एनडीआरएफ (NDRF) की 12 और एसडीआरएफ (SDRF) की 10 टीमें तैनात की गई हैं। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,087 मेडिकल टीमें, 1,274 एम्बुलेंस और आपातकालीन बेड तैयार रखे गए हैं। गर्भवती महिलाओं को एहतियातन सुरक्षित अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया है। चक्रवात 'अरनब' के कारण विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और राजमुंदरी हवाई अड्डों से उड़ानों का संचालन रद्द कर दिया गया है। मौसम विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि जब तक हवाएं पूरी तरह शांत नहीं हो जातीं, तब तक वे अपने घरों के अंदर ही रहें और बिजली के खंभों या बड़े पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
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