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शिरोमणि कमेटी सदस्य बलात्कार मामला: आम आदमी पार्टी ने अकाली नेताओं पर साधा निशाना, जारी की ऑडियो

02 Oct, 2026 01:27 PM

आम आदमी पार्टी (आप) ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज बलात्कार के मामले में एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी कर इसे एक नया मोड़ दे दिया है। ‘आप’ के पंजाब जनरल सचिव और मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की, जो अकाली नेता विरसा सिंह वलतोहा और चावला मामले की पीड़ित महिला के बीच हुई बातचीत पर आधारित है। इस ऑडियो के सामने आने के बाद ‘आप’ ने शिरोमणि कमेटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बलतेज पन्नू ने दावा किया कि इस कथित ऑडियो में 7-8 महीने के समय के दौरान वित्तीय लेन-देन का जिक्र किया गया है। पन्नू ने सवाल उठाया कि बहरीन से इस महिला को पंजाब क्यों लाया गया और उसे शिरोमणि कमेटी के नियंत्रण वाली इमारतों तथा सराय में लंबे समय तक कैसे ठहराया गया। उल्लेखनीय है कि पंजाब पुलिस ने इस महिला की शिकायत के आधार पर ही SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया था। अमरजीत सिंह चावला पहले ही इन तमाम आरोपों का खंडन करते हुए शिरोमणि अकाली दल के पदों से इस्तीफा दे चुके हैं और फिलहाल विदेश में हैं। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस घटना ने शिरोमणि अकाली दल के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। इस बीच, पंजाब पुलिस इस महिला की रहने की परिस्थितियों के अलावा उसे ठहरने की सुविधा मुहैया कराने वाले लोगों की भी गहन जांच कर रही है। ‘आप’ नेता बलतेज पन्नू ने SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल से सवाल किया है कि इस महिला को पंजाब लाने की क्या परिस्थितियां और उद्देश्य थे, तथा उसे शिरोमणि कमेटी की सराय में क्यों ठहराया गया था। उन्होंने पूछा कि क्या अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं को महिला की मौजूदगी और वहां रहने के हालात की जानकारी थी, और उसके ठहराव पर आया खर्च किन फंडों से किया गया था। पीड़ित महिला खुद यह कह चुकी है कि वह 17 नवंबर 2025 को बहरीन से वापस आई थी, जिसके बाद उसे तख्त श्री केसगढ़ साहिब की सराय में ठहराया गया था, जहां वह 27 फरवरी से 16 अगस्त 2026 तक रही और बाद में उसे दूसरी सराय में शिफ्ट कर दिया गया था। गौरतलब है कि शिरोमणि कमेटी पहले ही इस मामले की जांच के लिए एक आंतरिक कमेटी का गठन करने के साथ-साथ सीबीआई (CBI) जांच की मांग भी कर चुकी है।

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