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हाईवे से अस्पतालों तक आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नई योजना

25 May, 2026 11:15 AM

पंजाब में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए स्थानीय निकाय विभाग ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए विभाग ने आवारा कुत्तों के लिए ‘नो-गो ज़ोन’ की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए तैयार की जा रही व्यापक रणनीतिक कार्य योजना के तहत स्थानीय संस्थाओं ने राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सार्वजनिक संस्थानों में ‘नो-गो ज़ोन’ लागू करने का मसौदा तैयार किया है। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों को अंतिम रूप देने और लागू करने से पहले संवेदनशील संस्थानों की मैपिंग तथा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। विभाग ने राज्य के सभी 23 जिलों में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा है। वर्तमान समय में पंजाब में 18 एबीसी केंद्र संचालित हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक राज्यभर में हर महीने लगभग 3500 कुत्तों की नसबंदी की जाती है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में कुत्तों के काटने के 3.34 लाख मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, चालू वर्ष के पहले चार महीनों में ही 1.37 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जो प्रतिदिन औसतन 1,100 से अधिक घटनाओं के बराबर हैं। फिलहाल राज्य में केवल एक आवारा कुत्ता सेंक्चुरी मौजूद है। विभाग ने बड़ी संख्या में डॉग शेल्टर बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया है, जहां आवारा कुत्तों की देखभाल ‘प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट’ और ‘एबीसी रूल्स’ के अनुसार की जाएगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार इस सप्ताह औपचारिक कार्य योजना जारी की जाएगी। स्थानीय निकाय मंत्री Harjot Bains ने कहा कि आने वाले दिनों में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। योजना के तहत हाईवे से शुरुआत करते हुए स्थानीय निकाय अधिकारियों द्वारा परिवहन विभाग, पीडब्ल्यूडी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा विभाग यात्रियों की सुविधा के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर वाले साइन बोर्ड लगाने की भी योजना बना रहा है, ताकि लोग सड़क पर जानवरों से होने वाली रुकावट की सूचना तुरंत दे सकें। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क, धार्मिक स्थलों और हवाई अड्डों को प्राथमिकता वाले ‘नो-गो ज़ोन’ के रूप में चिन्हित किया जाएगा। प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो जानवरों के प्रवेश को रोकने, आठ सप्ताह के भीतर बाड़ और गेट मजबूत करने तथा वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। विभाग इस योजना को लागू करने के लिए सभी डिप्टी कमिश्नरों, नगर निगमों और पंचायती राज संस्थाओं को विस्तृत निर्देश जारी करेगा।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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