परविंदर झोटा मामला: पिता भीम सिंह ने ठुकराया 2 करोड़ का सरकारी मुआवजा व नौकरी; कहा- 'नशे के खिलाफ लड़ाई रहेगी जारी'
नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मौत के लगभग 23 दिनों के लंबे गतिरोध के बाद, उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ भेज दिया गया है। गुरुवार देर रात लगभग 12 बजे मानसा के सिविल अस्पताल से एंबुलेंस के जरिए पार्थिव देह को चंडीगढ़ रवाना किया गया। हालांकि, चंडीगढ़ पहुंचते ही परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह ने सरकार द्वारा घोषित मुआवजे और सरकारी नौकरी को साफ तौर पर ठुकरा दिया है और मानसा के एसएसपी (SSP) वैभव चौधरी के तबादले की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है।सरकारी मुआवजा, नौकरी और सुरक्षा लेने से साफ इंकारपीजीआई चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भीम सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्हें सरकार से किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद या परिवार के किसी सदस्य के लिए नौकरी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मुहैया कराई गई सुरक्षा की भी उन्हें कोई आवश्यकता नहीं है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, "हमारा बेटा तो दुनिया से चला गया, अब हम इस सुरक्षा का क्या करेंगे? मैं अब से अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं करूंगा और नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखूंगा। यदि इस संघर्ष में मेरी जान भी चली जाती है तो मुझे इसका कोई गम नहीं होगा।"मामले दर्ज रद्द करने की मांग पर अटका था मामलाइससे पहले मानसा के सिविल अस्पताल से शव को चंडीगढ़ भेजने को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। एक्शन कमेटी के सदस्यों की मांग थी कि जब तक दर्ज किए गए मामले रद्द नहीं किए जाते, तब तक शव को पोस्टमार्टम के लिए चंडीगढ़ नहीं ले जाया जाएगा। इस मांग को लेकर धरना स्थल पर नारेबाजी भी हुई। बाद में परिवार और एक्शन कमेटी के बीच सहमति बनने के बाद अरदास की गई और एंबुलेंस के जरिए देह को चंडीगढ़ भेजा गया। इस दौरान मानसा के सिविल सर्जन डॉ. रणजीत सिंह राय और सीबीआई के विशेष अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।लखा सिधाना और मोहनजीत सिंह शेरों जेल से रिहाइस पूरे घटनाक्रम के बीच, मानसा अदालत द्वारा रिहाई वारंट जारी किए जाने के बाद बीती रात लखा सिधाना और मोहनजीत सिंह शेरों को नाभा जेल से रिहा कर दिया गया। इसके अलावा बठिंडा जेल में बंद अन्य युवकों को भी रिहा किया गया, जिसके बाद ये सभी नेता मानसा के सिविल अस्पताल स्थित धरना स्थल पर पहुंचे। उल्लेखनीय है कि बुधवार शाम को राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल, परिवार और एक्शन कमेटी के बीच हुई बैठक में परिवार को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने और पत्नी को सरकारी नौकरी देने सहित अन्य मांगों पर सहमति बनी थी। अब पूरे मामले में सभी की निगाहें पीजीआई चंडीगढ़ में होने वाले पोस्टमार्टम और उसकी आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।