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भगवंत मान के कथित ट्वीट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाई कोर्ट जाने को कहा

25 May, 2026 06:30 PM

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित बयान का उल्लेख किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को खत्म करने के लिए “खुली छूट” दे दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग कर रहे अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा से कहा कि केवल किसी मुख्यमंत्री के बयान देने से अदालत अपने आदेश में बदलाव नहीं कर सकती। वकील ने यह मामला NGO ‘एनिमल्स आर पीपल टू’ की ओर से उठाया था। पीठ ने याचिकाकर्ता को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट जाने की सलाह देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले को हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में भेज चुका है। अदालत ने कहा कि आदेशों के पालन की निगरानी हाई कोर्ट द्वारा की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि सुप्रीम कोर्ट के 19 मई के आदेश के बाद आवारा कुत्तों को मारे जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। NGO ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने “आवारा कुत्तों को मारने की खुली छूट” दे दी है। याचिका में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री ने कथित रूप से बयान दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंजाब सरकार आवारा और खतरनाक कुत्तों को खत्म करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू करेगी, जो लोगों की जान के लिए खतरा बन रहे हैं। हालांकि, NGO ने इस बयान पर कड़ा विरोध जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की। संगठन ने कहा कि ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स, 2023’ के तहत केवल सीमित परिस्थितियों में, विशेषज्ञों की पुष्टि के बाद ही किसी कुत्ते को मारा जा सकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि अदालत के आदेश का उद्देश्य कभी भी बड़े पैमाने पर आवारा कुत्तों की हत्या या उन्हें जहर देकर मारने की अनुमति देना नहीं था। NGO ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को निर्देश दिए जाएं ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के नाम पर किसी भी कुत्ते को गैर-कानूनी तरीके से नुकसान न पहुंचाया जाए। गौरतलब है कि देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को पहली बार ऐसे आवारा कुत्तों को मारने की अनुमति दी थी, जो पागल, लाइलाज रूप से बीमार या स्पष्ट रूप से मानव जीवन के लिए खतरनाक हों।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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