FMD के खतरनाक 'SAT-1' स्ट्रेन से पशुधन की सुरक्षा: भारत ने आयोजित किया राष्ट्रीय टेबलटॉप अभ्यास 'वज्र-सैट'
पशुधन की सुरक्षा, किसानों की आजीविका और देश की डेयरी अर्थव्यवस्था को किसी भी संभावित महामारी से बचाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण एहतियाती कदम उठाया है। केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) ने बेंगलुरु स्थित ICAR-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान और रोग सूचना विज्ञान संस्थान (ICAR-NIVEDI) के सहयोग से खुरपका-मुंहपका रोग (Foot-and-Mouth Disease - FMD) के 'SAT-1' सीरोटाइप से निपटने के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय टेबलटॉप अभ्यास 'वज्र-सैट' (VAJRA-SAT) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यद्यपि FMD का 'SAT-1' स्ट्रेन भारत में अभी तक कभी दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन अफ्रीका से बाहर निकलकर पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में इसके प्रसार को देखते हुए भारत ने अग्रिम सुरक्षा रणनीति के तहत यह अभ्यास आयोजित किया। "शुरुआती पहचान, त्वरित पुष्टि और साझा रोकथाम" (Detect Early, Confirm Fast, Contain Together) के मुख्य विषय के तहत आयोजित इस टेबलटॉप अभ्यास में सीमा पार से फैलने वाली पशु बीमारियों के खिलाफ तैयारियों का गहन समीक्षात्मक मूल्यांकन किया गया। 83 प्रतिनिधियों और रक्षा एजेंसियों की रही व्यापक भागीदारीइस राष्ट्रीय अभ्यास में देश के 25 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 83 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें राज्य पशुपालन विभागों, ICAR संस्थानों, पशु रोग निदान प्रयोगशालाओं, पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों, टीका निर्माताओं, तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय एवं सीमा सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी शामिल रहे। प्रतिभागियों ने बीमारी फैलने की काल्पनिक परिस्थितियों (simulated scenarios) पर विचार-विमर्श करते हुए रोग पहचान, प्रयोगशाला जांच, आपातकालीन टीकाकरण, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की क्षमताओं को परखा। सीमा पर चौकसी और प्रयोगशाला ढांचे को मजबूत करने पर जोरअभ्यास के दौरान पशुपालन आयुक्त डॉ. नवीना बी.एम. ने अग्रिम योजना, त्वरित पहचान और केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के प्रतिनिधियों ने सीमा पार से संक्रमण के प्रवेश को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने का आह्वान किया। समापन सत्र में DAHD के अतिरिक्त सचिव राम शंकर सिन्हा ने क्षेत्रीय FMD प्रयोगशालाओं और रोग नैदानिक प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाकर राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर जांच ढांचे को अधिक सशक्त बनाने के निर्देश दिए।