बेलारूस से पोटाश खरीदने की ट्रंप की योजना पर सस्केचेवान के प्रीमियर स्कॉट मो ने जताई आपत्ति
- अंतरराष्ट्रीय
- (Asia/Kolkata)
सस्केचेवान के प्रीमियर स्कॉट मो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस संभावित योजना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसके तहत अमेरिका बेलारूस से बड़े पैमाने पर पोटाश खरीदने पर विचार कर रहा है। मो ने इस प्रस्तावित समझौते को “गलत” और “बेतुका” बताते हुए कहा कि बेलारूस से पोटाश खरीदना रूस के सैन्य अभियान को समर्थन देने जैसा होगा। सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उनकी टीम बेलारूस के साथ एक “बड़े समझौते” पर काम कर रही है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के तहत अमेरिका कनाडा की तुलना में काफी कम कीमत पर पोटाश प्राप्त कर सकेगा। ट्रंप ने इसे अमेरिकी किसानों और पशुपालकों के लिए लाभकारी कदम बताया। कनाडा वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा पोटाश निर्यातक देश है। वर्ष 2024 के दौरान कनाडा ने लगभग 2.29 करोड़ टन पोटाश का निर्यात किया, जो वैश्विक पोटाश निर्यात का 39 प्रतिशत से अधिक हिस्सा था। अमेरिका अपनी लगभग 85 प्रतिशत पोटाश जरूरत कनाडा से पूरी करता है। वहीं, अमेरिका को होने वाली कनाडाई पोटाश आपूर्ति में सस्केचेवान का योगदान 86 प्रतिशत से अधिक है। स्कॉट मो ने सवाल उठाया कि रूस के रास्ते आने वाली बेलारूसी पोटाश क्या सस्केचेवान से उत्तर अमेरिका के भीतर आपूर्ति की जाने वाली पोटाश से अधिक सस्ती, टिकाऊ या नैतिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित सौदे के आर्थिक और नैतिक दोनों पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। पोटाश उत्पादन के मामले में बेलारूस का स्थान कनाडा और रूस के बाद तीसरा है। हालांकि, मानवाधिकार संबंधी मुद्दों और यूक्रेन पर रूसी हमले में उसकी भूमिका के कारण अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ ने बेलारूस पर विभिन्न प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इसके बावजूद दिसंबर 2025 में अमेरिका ने बेलारूसी पोटाश पर लागू कुछ प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमति जताई थी। कनाडा और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव के दौरान पोटाश एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। स्कॉट मो पहले भी अमेरिका को पोटाश की आपूर्ति रोकने या इस पर निर्यात कर लगाने जैसे प्रस्तावों का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि सस्केचेवान अमेरिका जैसे अपने सबसे बड़े ग्राहक को खो देता है तो इसका सीधा प्रभाव प्रांत की नौकरियों, पोटाश उद्योग की कीमतों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, इस तरह का कोई भी बदलाव क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।
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