पांच आपराधिक मामलों के बावजूद आरोपी अश्विनी को मिला था हथों-हाथ हथियार लाइसेंस, पुलिस वेरिफिकेशन पर उठे सवाल
मानसा जिला प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के आरोपी अश्विनी कुमार को तमाम आपराधिक मामलों के बावजूद हथों-हाथ हथियार लाइसेंस जारी कर दिया गया था। आरोपी के खिलाफ पहले से ही पांच पुलिस केस दर्ज थे, जिनमें से तीन मामले अकेले जिला मजिस्ट्रेट के आदेशों की अवहेलना करने के थे। इसके बावजूद मानसा प्रशासन ने इन सभी मामलों को नजरअंदाज करते हुए उसे हथियार का लाइसेंस दे दिया। यह लाइसेंस किसी राजनीतिक दबाव के तहत जारी हुआ या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन अतिरिक्त उपायुक्त मानसा ने 21 अगस्त 2024 को अश्विनी कुमार को यह लाइसेंस जारी किया था। अश्विनी कुमार के पास इसी हथियार लाइसेंस के आधार पर दो लाइसेंसी हथियार थे, जिनमें एक 7.62 एमएम की पिस्टल और एक 12 बोर की गन शामिल थी। उसके इस लाइसेंस की वैधता 21 अगस्त 2024 से 20 अगस्त 2029 तक की थी। मानसा में अपनी मेडिकल दुकान पर परविंदर सिंह झोटा की हत्या करने के लिए आरोपी अश्विनी कुमार ने इसी लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल किया था। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपी को एक साथ 50 कारतूस खरीदने और एक साल में कुल 100 कारतूस खरीदने का अधिकार भी दिया गया था। मानसा के एसएसपी द्वारा इस हथियार लाइसेंस के लिए भेजी गई सिफारिश में अश्विनी कुमार पर दर्ज पांचों पुलिस मामलों का स्पष्ट जिक्र किया गया था। इसके अलावा, उसे खतरा होने का आधार मानसा के सिटी-2 थाने में 4 अप्रैल 2024 को दर्ज एफआईआर नंबर 66 को बनाया गया था। एसएसपी ने 9 अगस्त 2024 को पत्र क्रमांक 91/एनएएल के तहत लाइसेंस जारी करने की सिफारिश की थी, जिसके महज कुछ दिनों बाद 21 अगस्त 2024 को अतिरिक्त उपायुक्त ने लाइसेंस जारी कर दिया। नियमों के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट आमतौर पर उस व्यक्ति को हथियार का लाइसेंस बिल्कुल जारी नहीं करते, जिसके खिलाफ कोई भी पुलिस मामला दर्ज हो। यहाँ तक कि पुलिस केस दर्ज होने की स्थिति में जिला मजिस्ट्रेट कई बार पुराने लाइसेंसी का हथियार लाइसेंस भी रीन्यू नहीं करते हैं, लेकिन अश्विनी कुमार के मामले में सभी पांचों आपराधिक मामलों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।