बारिश और ओलों ने किसानों की उम्मीदें तोड़ीं, बैसाखी पर छाया मातम
पंजाब में बैसाखी के अवसर पर जहां खुशियों का माहौल होना चाहिए था, वहीं इस बार किसानों के बीच निराशा और चिंता का वातावरण बना हुआ है। पकी हुई गेहूं की फसल पर ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे त्योहार का उत्साह फीका पड़ गया है। राज्य में बैसाख महीने की शुरुआत से पहले ही तेज बारिश और आंधी-तूफान ने फसलों को प्रभावित किया। अब तक लगभग 1.30 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल खराब हो चुकी है। पिछले वर्ष भी बाढ़ के कारण छह लाख एकड़ से अधिक भूमि प्रभावित हुई थी। इस बार मुक्तसर और फाजिल्का जिलों के हजारों किसान परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कहीं गेहूं की फसल सुनहरी दिखाई दे रही है तो कहीं बारिश के कारण उसका रंग काला पड़ गया है। फसल नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम आज प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी और वास्तविक स्थिति का जायजा लेगी। बैसाखी का दिन उन परिवारों के लिए और अधिक दर्दनाक बन जाता है, जिन्होंने किसान आत्महत्याओं में अपने परिजनों को खोया है। फरीदकोट जिले के गांव हरी नौ में बैसाख से पहले ही सगे भाइयों जसविंदर सिंह और जसकरण सिंह ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी। बठिंडा के गांव गहरी बारा सिंह के किसान जगसीर सिंह ने सात वर्ष पहले बैसाखी के दिन ही आत्महत्या की थी, जिससे उनका परिवार आज भी इस दिन को दुख के साथ याद करता है। इसी तरह फाजिल्का के गांव वजीदपुर भोमा के किसान सिकंदर सिंह और दीड़बा के किसान सुखदेव सिंह ने भी बैसाखी के दिन ही अपनी जान दी थी। सुखदेव सिंह के परिवार को दस वर्ष बाद भी तीन लाख रुपये का मुआवजा नहीं मिला है। मानसा जिले के गांव टांडियां के जसपाल सिंह ने वर्ष 2022 में इसी दिन आत्महत्या की थी। बीते चार वर्षों से कई पीड़ित परिवारों को न तो कोई मुआवजा मिला है और न ही इसके लिए सरकार ने कोई अलग बजट निर्धारित किया है। किसानों और उनके संगठनों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसान के लिए सबसे बड़ी चिंता फसल के दाने बचाने की है, न कि त्योहार मनाने की। उनका आरोप है कि अब तक किसी भी सरकार ने ऐसी ठोस कृषि नीति लागू नहीं की, जो किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान कर सके। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी, पंजाब की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के किसानों पर केवल बैंकों का कर्ज 1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जो वर्ष 2019 में 65,310 करोड़ रुपये था। सात वर्षों में करीब 36 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बढ़ा है। मौजूदा हालातों में पंजाब का किसान गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, जिसके चलते बैसाखी जैसे प्रमुख त्योहार पर भी चिंता और दुख का माहौल बना हुआ है।
Posted By: Daily Suraj Bureau