पंजाब दौरे पर राघव चड्ढा, भाजपा नेतृत्व के साथ बंद कमरे में चुनावी रणनीति पर मंथन

पंजाब दौरे पर राघव चड्ढा, भाजपा नेतृत्व के साथ बंद कमरे में चुनावी रणनीति पर मंथन

आम आदमी पार्टी (आप) से अलग होने के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पहली बार पंजाब पहुंचे। इस दौरान लुधियाना में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेता नितिन नवीन की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बंद कमरे की बैठक में उन्होंने विशेष रूप से भाग लिया। बैठक में पार्टी के वर्तमान और पूर्व विधायक तथा वर्तमान और पूर्व सांसद भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान नितिन नवीन ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के संबंध में राघव चड्ढा से विस्तृत राजनीतिक फीडबैक लिया और उनकी राय को महत्व दिया। राघव चड्ढा को पंजाब की राजनीति और चुनावी समीकरणों की गहरी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के पीछे उन्होंने प्रमुख रणनीतिकार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी कारण उन्हें राज्य के लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों और राजनीतिक परिस्थितियों की अच्छी जानकारी रखने वाला नेता माना जाता है। हालांकि, राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी ने 2 अप्रैल को राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। इसके बाद 24 अप्रैल को उन्होंने अपने छह अन्य सांसद साथियों के साथ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। बाद में मई 2026 में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति (पिटीशन कमेटी) का अध्यक्ष नियुक्त किया। राघव चड्ढा का यह दौरा इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भाजपा में शामिल होने के बाद यह उनकी पहली पंजाब यात्रा है। बताया जा रहा है कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी भी उनके राजनीतिक कार्यक्रमों और गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए है। गौरतलब है कि राघव चड्ढा का मतदाता पंजीकरण पंजाब के मोहाली जिले में है, लेकिन हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान वह मतदान के लिए पंजाब नहीं पहुंचे थे। इससे पहले भी वह यह आशंका जता चुके हैं कि पंजाब की 'आप' सरकार उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के तहत निशाना बना सकती है। बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में राघव चड्ढा की यह पंजाब यात्रा और उनकी आगामी राजनीतिक गतिविधियां राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और विभिन्न दलों की निगाहें अब उनके अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।