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1984 सिख दंगा: गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब हिंसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, 30 नवंबर को अगली सुनवाई

31 Oct, 2026 04:04 PM

1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में हुई हिंसा के मामले में इंसाफ की लड़ाई और तेज हो गई है। दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा शनिवार (31 अक्टूबर) को दिल्ली हाईकोर्ट में खुद पेश हुए। उन्होंने अपनी याचिका में गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब हिंसा के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ की कथित भूमिका की विस्तृत और आगे की जांच कराने तथा उन पर कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई है। अदालत ने इस मामले पर गंभीरता दिखाते हुए अगली सुनवाई की तारीख 30 नवंबर तय की है। FIR नंबर 601/1984 और SIT की जांच का दायरा यह याचिका W.P.(CRL) 180/2022 (मनजिंदर सिंह सिरसा बनाम भारत सरकार व अन्य) के तहत दायर की गई है, जो संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR संख्या 601/1984 से संबंधित है। इसमें 1 नवंबर 1984 को गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब पर हिंसक भीड़ द्वारा किए गए हमले का उल्लेख है, जिसमें दो सिखों को जिंदा जला दिया गया था। उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 12 फरवरी 2015 को 1984 की हिंसा से जुड़े बंद हो चुके मामलों की पुनः जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जब रकाब गंज साहिब मामले में एसआईटी ने क्षेत्राधिकार की सीमा का हवाला दिया, तब मनजिंदर सिंह सिरसा ने तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने जांच का दायरा बढ़ाया। 9 अप्रैल 2019 के गृह मंत्रालय के पत्र के आधार पर एसआईटी ने 19 अगस्त 2019 को स्पष्ट किया कि बरी किए जाने के कारण बंद हुए गंभीर मामलों की भी आगे जांच की जाएगी। इसके बाद जारी सार्वजनिक नोटिस के तहत नानावती आयोग के समक्ष गवाही देने वाले मुख्तियार सिंह ने एसआईटी के सामने भी अपना बयान दर्ज कराया। गांधी परिवार और कांग्रेस पर दागे कड़े सवाल वर्ष 2018, 2019 और 2021 में लगातार अधिकारियों के सामने साक्ष्य प्रस्तुत कर चुके मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मुख्तियार सिंह के बयानों और विभिन्न आयोगों के रिकॉर्ड में कमलनाथ की कथित भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सिरसा ने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कमलनाथ को पार्टी में बड़े पद दिए जाते रहे। वे केंद्र सरकार में मंत्री रहे और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने। सिरसा ने कहा, "गांधी परिवार को बताना चाहिए कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद वे कमलनाथ का बचाव क्यों करते रहे? इस राजनीतिक संरक्षण के लिए पीड़ित सिख परिवारों से माफी मांगी जानी चाहिए। पीड़ितों को इंसाफ चाहिए, ताकतवर नेताओं का बचाव नहीं।" 'कानून से ऊपर कोई राजनीतिक पद नहीं' अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिल्ली के मंत्री ने कहा, "यह लड़ाई न्याय और उन परिवारों के सम्मान की है, जो चार दशकों से इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। समय बीत जाने से सिख परिवारों का दर्द कम नहीं हो सकता। कोई भी राजनीतिक पद किसी को कानून से ऊपर नहीं बना सकता।" 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई से पहले न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास जताते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस सुनवाई के दौरान ऐतिहासिक फैसले सामने आएंगे, सच्चाई देश के सामने आएगी और हिंसा के जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी।

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