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फ्रंटलाइन नौकरियों में महिलाओं का दबदबा: 43.5% महिलाएं कर रहीं आवेदन, पर केवल 13% विज्ञापनों में ही प्राथमिकता- रिपोर्ट

21 Sep, 2026 06:39 PM

देश में फ्रंटलाइन (Frontline) नौकरियों की तलाश कर रही महिलाओं की संख्या में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। ब्लू-कॉलर रोजगार प्लेटफॉर्म 'वर्कइंडिया' (WorkIndia) की ताजा 'रोजगार रिपोर्ट' के अनुसार, फ्रंटलाइन नौकरियों के लिए आवेदन करने वालों में अब महिलाओं की हिस्सेदारी 43.5 प्रतिशत हो चुकी है। हालांकि, इसके मुकाबले कंपनियों या नियोक्ताओं (Employers) द्वारा निकाली जा रही कुल नौकरियों में से केवल 13 प्रतिशत विज्ञापनों में ही विशेष रूप से महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। यह आंकड़ा महिला उम्मीदवारों की मांग और कंपनियों की पहुंच के बीच के बड़े अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह रिपोर्ट अप्रैल से जून 2026 के दौरान देश के 772 शहरों और 50 से अधिक फ्रंटलाइन नौकरी श्रेणियों में 6.5 लाख से ज्यादा जॉब पोस्टिंग्स और 98 लाख से अधिक आवेदनों के विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल पहले तक आवेदन करने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 40.4 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 43.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जून-जुलाई 2026 के बीच सालाना आधार पर नौकरियों के आवेदनों में 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि नई नौकरी के विज्ञापनों (Job Postings) में केवल 40 से 48 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी देखी गई। रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि महिलाएं अब पारंपरिक दायरों से बाहर निकलकर हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। सेल्स (Sales) सेगमेंट में सबसे ज्यादा 56 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी रही। इसके बाद दफ्तरी नौकरियों (Office roles), ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी का नंबर आता है। वहीं, पारंपरिक क्षेत्रों में ब्यूटीशियन नौकरियों के लिए 86.6 प्रतिशत और टीचिंग (शिक्षण) के लिए 80.7 प्रतिशत आवेदन महिलाओं की ओर से आए, जो इन क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाते हैं। इसके अलावा मार्केटिंग, कस्टमर सर्विस और ऑफिस स्टाफ के रूप में भी महिलाओं की मांग बढ़ी है। रिपोर्ट में एक और अहम खुलासा हुआ है कि 92 प्रतिशत फ्रंटलाइन नौकरियों के लिए अंग्रेजी भाषा की बहुत अधिक आवश्यकता नहीं है। इन नौकरियों में या तो अंग्रेजी की बिल्कुल जरूरत नहीं होती या फिर केवल सामान्य बातचीत जितनी ही समझ चाहिए। इससे यह साफ होता है कि हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के जरिए रोजगार हासिल करना अधिक आसान हो रहा है। वर्कइंडिया के सह-संस्थापक और सीईओ निलेश डांगरवाल ने कहा कि यदि कंपनियां महिलाओं के लिए सुरक्षा, काम के समय में लचीलापन (Flexibility) और बेहतर माहौल प्रदान करें, तो महिलाएं भारत की बढ़ती फ्रंटलाइन अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा स्रोत बन सकती हैं।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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