Daily Suraj

हिन्दी

कैलाश मानसरोवर मार्ग पर तनाव, नेपाल ने भारत-चीन को अवगत कराया रुख

04 May, 2026 01:11 PM

नेपाल सरकार ने लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराते हुए भारतीय श्रद्धालुओं से इस रास्ते का उपयोग न करने की अपील की है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल के अभिन्न अंग हैं। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उसने प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा के संदर्भ में अपनी चिंताओं और आपत्तियों को कूटनीतिक माध्यमों से भारत और चीन दोनों के समक्ष रखा है। नेपाल ने यह भी कहा कि वह पहले भी भारत से लगातार आग्रह करता रहा है कि वह विवादित क्षेत्र में सड़क निर्माण, व्यापार और पर्यटन जैसी गतिविधियों से परहेज करे। इसके अलावा, नेपाल ने आधिकारिक रूप से चीन को भी सूचित किया है कि लिपुलेख क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। पिछले सप्ताह चीन ने घोषणा की थी कि वह वर्ष 2026 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 1,000 भारतीय श्रद्धालुओं की यात्रा की सुविधा प्रदान करेगा। इसे दोनों देशों के बीच धार्मिक और द्विपक्षीय सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस बीच, भारत का विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यात्रा दो स्थापित मार्गों — लिपुलेख दर्रा और सिक्किम के नाथू ला दर्रे — के जरिए 10 बैचों में आयोजित की जाएगी, जिनमें प्रत्येक बैच में 50 श्रद्धालु शामिल होंगे। यह यात्रा जून से अगस्त 2026 के बीच प्रस्तावित है। कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। हालांकि, नेपाल लंबे समय से लिपुलेख क्षेत्र पर दावा करता रहा है और उसका कहना है कि भारत और चीन उसकी सहमति के बिना इस क्षेत्र के उपयोग से जुड़े निर्णय नहीं ले सकते। यह दर्रा कालापानी क्षेत्र में स्थित तीन प्रमुख बिंदुओं में से एक है। वर्ष 2020 में नेपाल ने संवैधानिक संशोधन के जरिए लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपने आधिकारिक राजनीतिक नक्शे में शामिल किया था। हालांकि नेपाल इन क्षेत्रों पर दावा करता है, लेकिन भारत दशकों से इन पर प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि महाकाली नदी के पूर्व के सभी क्षेत्र, जिनमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी शामिल हैं, नेपाल के हैं और इस मुद्दे पर काठमांडू का रुख पूरी तरह स्पष्ट और दृढ़ है। यह सीमा विवाद लंबे समय से भारत-नेपाल संबंधों में प्रमुख मुद्दों में से एक रहा है। नेपाल ने यह भी दोहराया कि वह इस विवाद को कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। बयान में कहा गया कि ऐतिहासिक संधियों, तथ्यों, नक्शों और प्रमाणों के आधार पर सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा।

Posted By: Daily Suraj Bureau

Latest News