गेहूं की बुवाई के बीच किसानों को झटका: दो महीने में दूसरी बार महंगी हुई NPK खाद
गेहूं की बुवाई के चालू सीजन के दौरान खाद कंपनियों द्वारा NPK खाद की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी किए जाने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले दो महीनों के भीतर दूसरी बार दरें बढ़ाते हुए NPK (12:32:16) खाद के 50 किलोग्राम वाले बोरे की कीमत 2,250 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दी गई है। इस बढ़ोतरी के बाद किसानों को अब प्रति बोरा 250 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे, जिससे प्रति क्विंटल कीमत में सीधे 500 रुपये का इजाफा हुआ है। भारतीय किसान यूनियन लखोवाल टिकैत के प्रदेश महासचिव सरूप सिंह रामा ने खाद के दामों में हुई इस वृद्धि पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि इससे पहले अगस्त महीने में भी खाद कंपनियों ने वर्ष 2025 की तुलना में NPK खाद की कीमत में 1,100 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया था। अब नवंबर महीने में दोबारा 500 रुपये प्रति क्विंटल दाम बढ़ा दिए गए हैं। खाद की दरों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी से किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। किसान नेता ने स्पष्ट किया कि देश भर में किसान DAP के विकल्प के रूप में बड़ी मात्रा में NPK खाद का उपयोग करते हैं। पंजाब में भी DAP की किल्लत के कारण किसान गेहूं की बुवाई के लिए NPK के 12:32:16 ग्रेड का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में खाद के दाम बढ़ाए जाने से किसानों के सामने नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। सरूप सिंह रामा ने आगे कहा कि साल-दर-साल खाद की कीमतों में वृद्धि होने से कृषि की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि इसके मुकाबले फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य या दामों में मामूली बढ़ोतरी ही देखने को मिलती है। इससे किसानों की आय और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि खादों पर दी जाने वाली सब्सिडी में बढ़ोतरी की जाए और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों की खेती पर आने वाली लागत को कम किया जा सके।