पटियाला, धर्मकोट और बाघापुराना में दोबारा चुनाव के आदेश, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई संभव

पटियाला, धर्मकोट और बाघापुराना में दोबारा चुनाव के आदेश, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई संभव

पंजाब की तीन नगर परिषदों—पटियाला, धर्मकोट और बाघापुराना—में वर्ष 2024 के चुनावों को लेकर उठे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छह सप्ताह के भीतर दोबारा चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत की टिप्पणियों के बाद उस समय चुनाव प्रक्रिया में तैनात रहे चुनाव और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
 

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया में शामिल सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत के समक्ष मामले की पैरवी कर रहे वकील ने बताया कि जांच आयोग की रिपोर्ट में उस समय ड्यूटी पर तैनात चुनाव अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों पर भी पक्षपात में शामिल होने की बात कही गई है।
 

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जांच आयोग की रिपोर्ट पहले लंबित थी, लेकिन अब इसे स्वीकार किया जा चुका है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की जरूरत है।
 

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में अधिकारियों को सीधे बर्खास्त करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। फिर भी अदालत की टिप्पणियों और आदेशों के अनुपालन के तहत पंजाब सरकार पर उस समय चुनाव ड्यूटी निभाने वाले संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।
 

2024 के चुनावों में लगाए गए थे धांधली और पक्षपात के आरोप
 

पटियाला, धर्मकोट और बाघापुराना नगर परिषदों के वर्ष 2024 के आम चुनावों के दौरान विपक्षी पक्षों ने कथित धांधली और पक्षपात के आरोप लगाए थे। इन आरोपों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
 

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। आयोग की रिपोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने तीनों नगर परिषदों में नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है।
 

अदालत ने सरकार को छह सप्ताह के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
 

इस बीच, जिला युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सोहन सिंह खेला ने कहा है कि यदि सरकार पिछले चुनावों में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती, तो वह दोबारा अदालत का रुख करेंगे।