यूएई में सोशल मीडिया पर गलत जानकारी साझा करने पर 45 लाख रुपये तक जुर्माना संभव
खाड़ी देशों में हाल ही में हुए हमलों के बाद बढ़े क्षेत्रीय तनाव के बीच दुबई के अधिकारियों ने निवासियों को सोशल मीडिया पर अप्रमाणित या “नकारात्मक” सामग्री साझा करने को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। ऑनलाइन वायरल हो रही एक वीडियो, जिसे विशेष रूप से यूएई में रहने वाले भारतीय समुदायों के बीच साझा किया जा रहा है, में एक व्यक्ति को दुबई पुलिस के प्रतिनिधि के रूप में दिखाया गया है। वीडियो में लोगों से दुर्घटनाओं, आग या अन्य नकारात्मक घटनाओं से संबंधित क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने की अपील की गई है। इसमें कहा गया है कि इस तरह की पोस्ट दुबई की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं। वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को “सीधे देश निकाला” (डिपोर्टेशन) का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गलत जानकारी फैलाने के मामलों में कार्रवाई यूएई के साइबर क्राइम कानूनों के तहत की जाती है, न कि किसी स्वचालित डिपोर्टेशन नीति के आधार पर। अफवाहों और साइबर अपराधों से निपटने के लिए लागू संघीय डिक्री-लॉ नंबर 34 (2021) के अनुसार, आधिकारिक घोषणाओं के विपरीत झूठी, भ्रामक या अप्रमाणित जानकारी का प्रसार करना आपराधिक अपराध माना जाता है और इसके लिए कानूनी सजा का प्रावधान है। दुबई पुलिस सहित संबंधित अधिकारियों ने दोहराया है कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 200,000 एईडी (लगभग 45 लाख रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि गलत जानकारी के कारण सार्वजनिक दहशत फैलती है या सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होता है, तो जेल की सजा भी हो सकती है। संकट की स्थिति में इन दंडों को और कड़ा किया जा सकता है। इस बीच, दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और यूएई साइबर सुरक्षा परिषद ने भी लोगों को इंटरनेट पर प्रसारित हो रहे मनगढ़ंत या डिजिटल रूप से संपादित वीडियो से सावधान रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने नागरिकों और निवासियों से अपील की है कि वे किसी भी अपडेट के लिए केवल आधिकारिक सरकारी चैनलों पर ही भरोसा करें।
Posted By: Daily Suraj Bureau