हिमाचल में एंट्री टैक्स बढ़ोतरी पर टकराव, पंजाब दे सकता है जवाबी कदम
पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों के बीच एंट्री टैक्स को लेकर विवाद गहरा गया है। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मुख्य और छोटी सड़कों पर लगाए गए एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी के बाद पंजाब ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। पंजाब सरकार ने संकेत दिए हैं कि हिमाचल से राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों पर टैक्स लगाया जा सकता है। इस विवाद का सीधा असर आम यात्रियों और पर्यटकों पर पड़ रहा है। देशभर से आने वाले सैलानी, विशेषकर दिल्ली, गुजरात और दक्षिण भारत के धार्मिक यात्री, जो अक्सर इन दोनों राज्यों के बीच यात्रा करते हैं, अब बढ़े हुए यात्रा खर्च का सामना करेंगे। यह विवाद मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश द्वारा राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों, खासकर बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर लगाए गए एंट्री टैक्स को लेकर है। यह टैक्स अंतरराज्यीय बैरियरों पर वसूला जाता है और निजी वाहनों, बसों, व्यावसायिक परिवहन और मालवाहक वाहनों पर लागू होता है। हालांकि यह व्यवस्था कई दशकों से लागू है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी ने लोगों में असंतोष पैदा कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स का इतिहास ‘हिमाचल प्रदेश टोल एक्ट, 1975’ से जुड़ा है। वर्ष 2003 में इसे निजी वाहनों तक विस्तारित किया गया था, उस समय यह टैक्स 30 रुपये था। वर्ष 2017 से 2022 के बीच राज्य सरकार ने अपने राज्य में पंजीकृत वाहनों को छूट देते हुए बाहरी राज्यों के वाहनों पर टैक्स 40 रुपये कर दिया था। वर्तमान में कांग्रेस सरकार ने पहले इसे 40 रुपये से बढ़ाकर 70 रुपये किया और अब आगामी वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2026 से इसे 170 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। नई दरों के अनुसार निजी कारों पर टैक्स 70 रुपये से बढ़कर 170 रुपये, मिनी बसों पर 180 रुपये से 320 रुपये, बसों पर 320 रुपये से 600 रुपये और भारी मालवाहक वाहनों पर 720 रुपये से 900 रुपये कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन विशेष रूप से पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे रोपड़, नंगल और आनंदपुर साहिब में हो रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग रोजाना काम, व्यापार, शिक्षा और पारिवारिक कारणों से हिमाचल प्रदेश आते-जाते हैं। ट्रांसपोर्टरों और टैक्सी चालकों का कहना है कि बढ़े हुए टैक्स से परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत में वृद्धि होगी। आलोचकों का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस प्रकार का टैक्स लगाना अंतरराज्यीय मुक्त आवागमन के सिद्धांत के खिलाफ है। हिमाचल प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष में एंट्री टैक्स से 170 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा। राज्य में 50 से अधिक टोल बैरियर संचालित हैं। सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने के बाद वित्तीय स्थिति को संभालने के लिए यह कदम आवश्यक है। पंजाब की ओर से आनंदपुर साहिब के विधायक और मंत्री हरजोत सिंह बैंस इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पंजाब सरकार हिमाचल के वाहनों पर जवाबी टैक्स लगाने पर विचार कर रही है और इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावना भी जताई जा रही है। इस पूरे विवाद का सबसे अधिक प्रभाव सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों, ट्रक चालकों, बस ऑपरेटरों, टैक्सी चालकों और उन दुकानदारों तथा ढाबों पर पड़ेगा, जो अंतरराज्यीय आवाजाही पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान के लिए सीमावर्ती निवासियों को छूट या रियायत देने और दोनों राज्यों के बीच बातचीत जरूरी है। फिलहाल यह मामला हिमाचल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। यदि दोनों राज्यों द्वारा जवाबी कदम उठाए जाते हैं, तो यह स्थिति “टैक्स वॉर” का रूप ले सकती है।
Posted By: Daily Suraj Bureau