श्री आनंदपुर साहिब मामले पर एडवोकेट धामी का बयान: आरोपों को बताया बेबुनियाद, जांच रिपोर्ट के बाद देंगे हर सवाल का जवाब

श्री आनंदपुर साहिब मामले पर एडवोकेट धामी का बयान: आरोपों को बताया बेबुनियाद, जांच रिपोर्ट के बाद देंगे हर सवाल का जवाब

श्री आनंदपुर साहिब की सराय में हुई घटना के मामले को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं दूसरी ओर, श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकित सिंह, जिन्हें पहले निलंबित किया गया था, उन्हें सेवाओं से पूरी तरह बर्खास्त कर दिया गया है। इस बात का खुलासा SGPC के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने किया। उन्होंने मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि बहरीन से आई महिला के आगमन के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी और न ही उस महिला ने उनसे मिलकर घटना के संबंध में कोई बात की। एडवोकेट धामी ने महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया। जांच के लिए गठित कमेटी में बलदेव सिंह कायमपुर, गुरमीत सिंह बूह, बीबी गुरिंदर कौर भोलूवाला और गुरबख्श सिंह खालसा शामिल हैं, जबकि SGPC के सचिव बलविंदर सिंह काहलवां कमेटी के समन्वयक (को-ऑर्डिनेटर) होंगे। एडवोकेट धामी ने बताया कि जिस दिन यह मामला सामने आया था, उसी दिन सचिव काहलवां को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में उठ रहे अन्य सवालों के जवाब दिए जाएंगे। SGPC अध्यक्ष ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा ज्ञानी मलकित सिंह को पंथ से निष्कासित (छेका) किए जाने के फैसले के तुरंत बाद SGPC ने उन्हें संस्था की सेवाओं से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा, श्री आनंदपुर साहिब से एक चालक को भी निलंबित किया गया है। साथ ही, मामले से जुड़े अमरजीत सिंह चावला द्वारा SGPC सदस्यता से दिया गया इस्तीफा भी तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है। गौरतलब है कि पांच सिंह साहिबान द्वारा SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला और श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकित सिंह को पंथ से निष्कासित कर दिया गया था और सिख संगत को उनसे किसी भी प्रकार का संबंध न रखने की हिदायत दी गई थी। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में अमरजीत सिंह चावला ने श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज्ज के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले एक बार उनका पक्ष भी जरूर सुना जाना चाहिए था।