पटाखा बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख: केंद्र को दिए निर्देश, कहा— अदालती आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के बाजारों में जारी प्रतिबंधों के बावजूद सभी प्रकार के पटाखों की खुलेआम बिक्री पर प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का कड़ा संज्ञान लिया है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को अपने निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी को हर तरह के—चाहे वे लाइसेंस प्राप्त हों, बिना लाइसेंस वाले हों या क्यूआर (QR) कोड वाले हों—पटाखों की बिक्री पर तुरंत ध्यान देने और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। दिवाली पर केवल ग्रीन पटाखों के लिए निर्धारित समय सर्वोच्च अदालत ने अपने 29 अक्टूबर के आदेश का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि दिवाली के अवसर पर (7 और 8 नवंबर को) दिल्ली-एनसीआर में केवल 'ग्रीन पटाखे' (Green Crackers) फोड़ने की ही छूट दी गई है। इसके लिए समय भी निर्धारित किया गया है, जिसके अनुसार सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे चलाए जा सकते हैं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए फिलहाल पूरे आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। प्रशासन की ढिलाई पर निराशा और संवैधानिक सीमाएं अदालती आदेशों का उचित अनुपालन न होने पर असंतोष व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं या रीति-रिवाजों का अधिकार सीमित है और यह अधिकार संवैधानिक प्रतिबंधों से ऊपर नहीं हो सकता। 9 नवंबर से लागू होगा पूर्ण प्रतिबंध और 'नो-क्रैकर जोन' सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2025 के आदेशों का हवाला देते हुए याद दिलाया कि 9 नवंबर से दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध पुन: प्रभावी हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, अदालत ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, वृद्धाश्रमों और 'साइलेंस जोन' (Silence Zone) के 300 मीटर के दायरे को 'नो-क्रैकर जोन' घोषित किया है। इन क्षेत्रों में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक रहेगी।