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समस्त वाल्मीकि कौम ने प्रभु रत्नाकर जी को जन्मदिवस पर श्रद्धा के फूल भेंट किए

06 Apr, 2026 05:52 PM

लुधियाना भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज रजि. भावाधस के राष्ट्रीय मुख्य संचालक वीरेश विजय दानव द्वारा आज 6 अप्रैल को समूह देशवासियों को भावाधस के संस्थापक और प्रथम आदि धर्म गुरु ब्रह्मलीन प्रभु ऋषिनाथ रत्नाकर जी महाराज के जन्मदिवस की समूह देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज के दिन समूचे देश में विभिन्न स्थानों पर प्रभु जी का जन्मदिवस मनाया जा रहा है और भावाधस की समूची टीम भी प्रभु को श्रद्धा के फूल भेंट करती है। उन्होंने कहा कि प्रभु ऋषिनाथ रत्नाकर जी ने अपना संपूर्ण जीवन वाल्मीकि कौम की प्रगति और उत्थान के लिए लगाया और समूचे भारत के वाल्मीकि समाज के नेताओं को एकता की माला में पिरोकर भावाधस की स्थापना की जो कि आज भी वाल्मीकि समाज की प्रगति के लिए काम कर रही है और आदि नित्यनेम, सच्ची प्रार्थना, शारशब्द आदि उनकी ही कौम को देन हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु जी का संपूर्ण जीवन भगवान वाल्मीकि जी की शिक्षाएं घर-घर तक पहुंचाने को समर्पित रहा है और प्रभु जी कौम के महान संत थे जिन्होंने कौम की सेवा के लिए सारी उम्र विवाह तक भी नहीं करवाया था। उन्होंने कहा कौम को ऐसे संतों की कमी हमेशा ही खटकती रहेगी। उन्होंने कहा कि आज भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी जहां वाल्मीकि कौम बसती है, वह प्रभु रत्नाकर जी की विचारधारा को ही स्वीकार करती है और वाल्मीकि धर्म के लिए प्रभु जी ने कई किताबें और वाणी की रचना की है और प्रभु जी का नाम हमेशा ही रहती दुनिया तक प्रभु रत्नाकर जी का नाम अमर रहेगा। उन्होंने कहा कि 12 अप्रैल को जालंधर के गांव धीना में प्रभु जी के जन्मदिवस के अवसर पर एक विशाल समारोह का आयोजन किया जा रहा है और इसी समारोह में समूचे देश से प्रभु जी को प्यार करने वाले इस समारोह में शिरकत करेंगे, वहीं वाल्मीकि की मौजूदा दशा और दिशा के बारे में भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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