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पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका: हाईकोर्ट ने खारिज की नियमित जमानत याचिका

16 Oct, 2026 10:09 AM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ दायर इस याचिका पर न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी की पीठ ने खुली अदालत में फैसला सुनाया। संजीव अरोड़ा ने अदालत में दावा किया था कि वह 9 मई से हिरासत में हैं। इससे पहले गुरुग्राम में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत विशेष न्यायाधीश के समक्ष दायर उनकी नियमित जमानत अर्जी 15 जून को खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से दी गई दलीलें याचिका में अरोड़ा ने तर्क दिया कि वह पंजाब सरकार में वर्तमान कैबिनेट मंत्री और पूर्व राज्यसभा सांसद हैं, जिनकी समाज में गहरी जड़ें हैं और उनका सार्वजनिक रिकॉर्ड बेदाग रहा है। उनके वकील ने अदालत को बताया कि वह मैसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) के प्रवर्तक और अध्यक्ष हैं, जो 1987 में स्थापित हुई थी। हालांकि, कैबिनेट मंत्री के रूप में पद संभालने के बाद उन्होंने कंपनी के दैनिक कामकाज में भाग लेना बंद कर दिया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, अभियोजन (ED) का मामला इन आरोपों पर आधारित है कि HSRL ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित इकाइयों को मोबाइल फोन निर्यात किए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने वाली कुछ इकाइयां शैल (फर्जी) कंपनियां थीं, जो फर्जी चालान और एंट्री जारी करने में लगी हुई थीं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ED बिना किसी अनुसूचित अपराध (Scheduled Offence) को साबित किए इन निर्यात सौदों को 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) के रूप में दर्शाने की कोशिश कर रही है। दस्तावेजी सबूतों और स्वास्थ्य का दिया गया हवाला अरोड़ा के वकील ने तर्क दिया कि HSRL द्वारा किया गया निर्यात पूरी तरह से प्रामाणिक और व्यापारिक लेनदेन था, जिसे खरीद चालान, ई-वे बिल, जीएसटी रिकॉर्ड, शिपिंग बिल, कस्टम दस्तावेज, एयरवे बिल और बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट का समर्थन प्राप्त था। कस्टम अधिकारियों द्वारा जांच के बाद "लेट एक्सपोर्ट ऑर्डर" जारी किए गए थे और भुगतान नियमित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त हुआ था। इसके अलावा, याचिका में कहा गया कि मंत्री के आवास, उनके बेटे के आवास और कंपनी परिसरों की व्यापक तलाशी के बावजूद कोई आपत्तिजनक दस्तावेज, अघोषित संपत्ति या डिजिटल रिकॉर्ड बरामद नहीं हुआ था। संजीव अरोड़ा ने अपनी लगभग 62 वर्ष की आयु, वरिष्ठ नागरिक होने और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का हवाला देते हुए कहा कि पूरा मामला पहले से जब्त दस्तावेजों पर आधारित है, इसलिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ या भागने की कोई संभावना नहीं थी। हालांकि, अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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